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नर्मदा घाट पर गंदगी देख आहत हुए परिक्रमावासी आस्था पर चोट से उपजा आक्रोश, मुक्तिधाम मार्ग पर आधे घंटे जाम

डिंडोरी -- डिंडोरी नगरी को मां नर्मदा के प्रथम पड़ाव होने का गौरव प्राप्त है। यही वह पावन भूमि है, जहां परिक्रमा पथ पर चलने वाले श्रद्धालु मां नर्मदा के साक्षात दर्शन कर अपने जीवन को धन्य मानते हैं। किंतु जब इसी प्रथम पड़ाव पर मां नर्मदा का निर्मल आंचल गंदे नालों से मैला होता दिखे, तो भक्तों के हृदय में उठने वाली पीड़ा स्वाभाविक है।बुधवार को कुछ ऐसा ही दृश्य डेमघाट पर देखने को मिला, जब लगभग 40 से 50 परिक्रमावासियों ने नालियों के माध्यम से बहती गंदगी को सीधे मां नर्मदा में समाहित होते देखा। यह दृश्य उनके लिए असहनीय था। श्रद्धा पर कुठाराघात से आहत परिक्रमावासियों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने घाट के समीप मुक्तिधाम मार्ग पर लगभग आधे घंटे तक चक्का जाम कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही एसडीओपी सतीश द्विवेदी तहसीलदार रामप्रसाद मार्को के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिक्रमावासियों की व्यथा को गंभीरता से सुना और नगर पालिका कर्मी सुरेन्द्र बिहारी शुक्ला को आवश्यक निर्देश देते हुए शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। प्रशासन के आश्वासन के बाद परिक्रमावासियों ने जाम हटाया। इस दौरान बड़ी संख्या में नर्मदा सेवक, श्रद्धालु एवं नगर के युवा भी एकजुट होकर परिक्रमावासियों की पीड़ा में सहभागी बने।

“आस्था के साथ अन्याय” -- मध्यप्रदेश के सागर जिले से नर्मदा परिक्रमा कर रहे शिवकुमार तिवारी ने कहा कि उन्होंने संपूर्ण नर्मदा खंड में ऐसी गंदगी कहीं नहीं देखी। उन्होंने इसे डिंडोरी की दुर्भाग्यपूर्ण विडंबना बताया कि जहां एक ओर नर्मदा को स्वच्छ रखने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं यहां मां नर्मदा की पवित्रता से खुला खिलवाड़ हो रहा है। स्नान पश्चात किए जाने वाले धार्मिक नियमों का पालन करना तक दूभर हो गया है।

“अमरकंटक से सागर तक नहीं देखी ऐसी गंदगी”-- परिक्रमावासी जागेश्वर गंधवाने ने व्यथित स्वर में कहा कि अमरकंटक से समुद्र-सागर तक की यात्रा में उन्होंने ऐसी स्थिति कहीं नहीं देखी। उन्होंने नगरवासियों से मां नर्मदा में साबुन व अन्य रासायनिक पदार्थों के प्रयोग से परहेज करने की अपील की।

डिंडोरी: आस्था का केंद्र, लेकिन व्यवस्थाएं नदारद -- नगर के युवा समाजसेवी पवन बर्मन ने बताया कि मां नर्मदा के कारण डिंडोरी श्रद्धा और विश्वास का प्रमुख केंद्र है। लेकिन दुखद तथ्य यह है कि परिक्रमावासियों की धर्मशालाओं के समीप स्थित नालियां अक्सर जाम रहती हैं, जिनका दूषित जल मुख्य मार्ग से होते हुए सीधे घाटों तक पहुंचता है। घाटों पर डस्टबीन जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं का भी अभाव है।उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की कि शीघ्र ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि मां नर्मदा की पवित्रता बनी रहे और परिक्रमावासियों की आस्था को ठेस न पहुंचे।

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