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महाबोधी महाविहार में बौद्ध प्रतिनिधित्व की माँग को लेकर सत्याग्रह के 344वें दिन हुए पूरे, 1 फरवरी 2026 को ‘बोधगया चलो’ का आह्वान

बोधगया (गया)
महाबोधी महाविहार धर्म स्थल पर 297 दिनों से जारी शांतिपूर्ण सत्याग्रह के उपलक्ष्य में आज विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने बताया कि 12 फरवरी 2025 (माघ पूर्णिमा) से शुरू हुआ यह सत्याग्रह बुद्ध, बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर और महात्मा गांधी के दिखाए अहिंसा और संवैधानिक पथ पर लगातार संचालित है। इस दौरान देशभर में मसाल यात्राएँ निकाली जा रही हैं और सुप्रीम कोर्ट में भी इस मुद्दे पर सुनवाई जारी है, जिसकी अगली तिथि 9 दिसंबर 2025 तय है।

1949 के बीटी एक्ट में संशोधन की मांग तेज
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं ने कहा कि महाबोधी महाविहार विश्व बौद्ध समुदाय की आस्था का प्रमुख केंद्र है, फिर भी वर्तमान बीटी एक्ट 1949 के अंतर्गत महाविहार की संचालन समिति में केवल चार बौद्ध सदस्य शामिल हैं। यह व्यवस्था बौद्धों के धार्मिक अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय भावनाओं के विरुद्ध बताई गई।
आंदोलनकारियों ने दोहराया कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र है और प्रत्येक धर्म के अनुयायियों को अपने सबसे पवित्र स्थलों के संचालन में प्रतिनिधित्व का अधिकार मिलना चाहिए। इसलिए बिहार सरकार को इस अधिनियम में आवश्यक संशोधन करते हुए बौद्ध समुदाय को पूर्ण प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना चाहिए।

सरकारी दबाव और नोटिस का आरोप
आंदोलनकारियों ने प्रेस के समक्ष कहा कि प्रशासन द्वारा बार-बार नोटिस जारी कर धरना समाप्त करने का दबाव बनाया जा रहा है। कई बार रात के मध्य नोटिस देकर अनुमति न देने की बात कही गई, जो आंदोलन को बाधित करने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि यह व्यवहार भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों —
अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा का अधिकार) एवं
अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता)
— का हनन है।

उनका कहना है कि यदि सरकार से संवाद और न्यायपूर्ण समाधान नहीं मिलता, तो सत्याग्रह अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा, क्योंकि “सत्य की विजय अवश्यंभावी है।”

1 फरवरी 2026 को ‘बोधगया चलो’ अभियान
आंदोलनकारियों ने घोषणा की कि आगामी माघ पूर्णिमा, 1 फरवरी 2026 को एक विशाल जनसभा और धर्मसभा का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने देश-विदेश के भिक्षुओं, उपासक-उपासिकाओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और प्रगतिशील नागरिकों से बोधगया पहुँचकर समर्थन देने की अपील की।
1 फरवरी से 12 फरवरी 2026 तक बोधगया में कई धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसका उद्देश्य बौद्धों के अधिकारों और विश्व शांति का संदेश देना होगा।

6 दिसंबर को शांतिपूर्ण धम्म यात्रा
उन्होंने यह भी बताया कि 6 दिसंबर को बोधिसत्व बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर सुबह 7 बजे से धम्म चारिका निकाली जाएगी, जिसमें सभी प्रतिभागियों के हाथ में बाबा साहब की तस्वीरें होंगी। यात्रा महाबोधी मंदिर और जय नारायण उद्यान होते हुए वापस धरना स्थल पर शांतिपूर्वक समाप्त होगी।

आंदोलनकारियों ने कहा कि बोधगया बुद्ध की धम्म भूमि है और यहाँ बौद्धों के अधिकार एवं सम्मान की रक्षा तक यह सत्याग्रह अटल रूप से चलता रहेगा। उन्होंने स्थानीय समाज और बुद्ध अनुयायियों से न्याय की इस मांग में साथ आने की अपील की।

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