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दिव्यांग विद्यालय के बच्चों ने विधि विधान से किया मां सरस्वती जी का पूजन

श्री समरथ्थी राजाराम दिव्यांग एवं बालिका शिक्षण संस्थान कुशहा, घनश्यामपुर, बदलापुर ,जौनपुर के बच्चों ने आज बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर मां सरस्वती की विधि विधान से पूजन अर्चन की जिसमें विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रमोद तिवारी ने कहा कि बसंत पंचमी या श्री पंचमी हिन्दू त्यौहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती, कामदेव और विष्णु की पूजा की जाती है। यह पूजा विशेष रूप से भारत, बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करते हैं। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है l अमर सिंह ने बताया कि प्राचीन भारत और नेपाल में पूरे साल को जिन छह ऋतुओं में बाँटा जाता था उनमें वसंत लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था। जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों में सरसों का फूल मानो सोना चमकने लगता, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमों के पेड़ों पर मांजर आ जाता और हर तरफ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं। भर-भर भंवरे भंवराने लगते। अंतिम रजक ने कहा कि वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा उत्सव मनाया जाता था जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती हैं। यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था। इस अवसर पर विद्यालय के बच्चे तथा अध्यापक ,अध्यापिकाएं उपस्थित रहे l

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