logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

वसंत पंचमी पर बटमूल आश्रम में गूँजे मंत्र 11 वटुकों का सामूहिक व्रतोपनयन संपन्न

सामूहिक व्रतोपनयन: संस्कार भी, सरोकार भी ​उत्कल ब्राह्मण महिला सेवा समिति रायगढ़

रायगढ़ सामूहिक व्रतोपनयन (जनेऊ संस्कार) सनातन परंपरा को जीवित रखने की एक उत्कृष्ट और समसामयिक पहल है, जो मुख्य रूप से खर्चीली व्यक्तिगत आयोजनों के विकल्प के रूप में उभरी है। यह अनावश्यक अपव्यय को कम करती है, और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देती है, जिससे एक साथ कई बच्चों का संस्कार विधिवत संपन्न हो जाता है।
आप सबके सहयोग और उत्कल ब्राह्मण महिला सेवा समिति रायगढ़ के तत्वावधान में लगातार पांच वर्षों से हर वर्ष वसंतपंचमी को सामूहिक व्रतोपनयन का आयोजन किया जा रहा है।उत्कल ब्राह्मण महिला सेवा समिति रायगढ़  मुख्य आचार्य - पंडित सरोज पंडा जी कथा वाचक संरक्षक - श्रीमती पूर्णमासी सतपथी की श्रीमती सुरेंदी मिश्रा जी अध्यक्ष - श्रीमती आशा पडा उपाध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी शर्मा श्रीमती अंजू शर्मा श्रीमती कल्पना नन्दे श्रीमती स्वधामीनी महापात्र,सचिव श्रीमती वंदना महापात्र कोषाध्यक्ष श्रीमती सुधा होता  संगठन सचिव - श्रीमती मनीष मिश्रा,श्रीमती निर्मला महापात्र  सहसचिव श्रीमती प्रभाती महापात्र सह  कोषाध्यक्ष - श्रीमती चंद्र कांति मिश्रा शिक्षा प्रकोष्ठ श्रीमती यज्ञ सेनी मिश्रा सलाहकार समिति सर्व श्री शिशुपाल मिश्रा,श्री इंद्र विलास पंडा,श्री उपेंद्र सतपति,श्री संतोष होता, श्री छत्रपाल शर्मा जी श्री ज्ञान शर्मा,श्री सरोज नंदे,श्री प्रमोद महापात्र,श्री कृष्णा मिश्रा,श्री गदाधर आचार्य कार्यकारिणी श्रीमती रेणुका पंडा सुषमा होता श्रीमती प्रभासिनी सतपथी श्रीमती आशा मिश्रा श्रीमती सुषमा होता श्रीमती अन्नपूर्णा मिश्रा इस वर्ष 2026  वसंतपंचमी को  भी सामूहिक व्रतोपनयन का आयोजन बटमूल आश्रम बनोरा में रखा गया, जिसमें 11 वटुकों का व्रतोपनयन विधि विधान से किया गया है। रायगढ़ जिला के अलावा अन्य जिलों और अन्य प्रदेशों से भी वटुकों का पंजियन हुआ है। उत्कल ब्राह्मण महिला सेवा समिति का उद्देश्य ही समाज के एकरूपता लाना और अपव्यय को कम करना है, हमें लगता है इस तरह के आयोजन से समाज में एकरूपता लाने के साथ साथ अपव्यय को कम करने में सफल हुए हैं। हम सबको समझना होगा व्यक्तिगत आयोजन के मुकाबले सामूहिक आयोजन में खर्च बहुत कम हो जाता है, यह आयोजन समाज के विभिन्न परिवारों को जोड़ता है और समाज के लोगों को एक साथ मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करता है। तथा व्यक्तिगत आयोजनों में होने वाले अनावश्यक प्रदर्शन और खर्चे पर अंकुश लगाती है। यह पहल न केवल प्राचीन संस्कृति का संरक्षण करती है, बल्कि समाज में एकजुटता की भावना को भी पुष्ट करती है। तो आइये आप और हम सब मिलकर इस तरह के  आयोजनों को सफल बनाने में हमेशा प्रयासरत रहे....

12
272 views

Comment