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ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई के नाम पर जारी किए जाने वाले धन का बंदर बाँट किया गया है।

मेरे गांव केरू में ग्रामीण क्षेत्र की सफाई के नाम पर 5.5 लाख रुपए खर्च हुए का भुगतान सरकारी खजाने से उठाया गया। गांव में कभी कोई व्यक्ति सफाई के लिए नहीं आया। इसके बारे मे किसी को मालूम भी नहीं था। यह केवल सरपंच तक जानकारी थी।जब इसकी भनक लगी तो एक दिन सफाई करने के लिए एक ठेकेदार के लोग आए और 3 कचरा पात्र रख गए। उसके बाद कोई उस कचरे को उठाने नही आया। उस कचरे को भूखी आवारा गाय खाती है। आवारा पशुओं की, खास कर आवारा गायों की बहुत बड़ी समस्या हैं।

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