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MSP के लिए किसानो ने अपनाया अनोखा तरीका लोकसभा में पेश होने वाले बजट में किसानों के हित में बड़े फैसले लेने की मांग की।

सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के चंदेरी गांव में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर एक अनोखा तरीका अपनाया
किसान व समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में किसानों ने गेहूं की फसल के बीच बैठकर ढोलक, पेटी और झांझ की धुन पर भजन-कीर्तन गाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लोकसभा में पेश होने वाले बजट में किसानों के हित में बड़े फैसले लेने की मांग की।
किसानों ने भजन “हे प्रभु मोदी है दाता, हे प्रभु मोदी है दाता, ऐसी कृपा कीजिए, सारे किसान मांग रहे हैं, बजट में MSP दीजिए।” के माध्यम से केंद्र सरकार से आग्रह किया कि 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में किसानों की फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा जाए और प्रमुख फसलों के दामों में बढ़ोतरी की जाए। किसानों की प्रमुख मांग है कि सोयाबीन का भाव ₹8000 प्रति क्विंटल और गेहूं का भाव ₹5000 प्रति क्विंटल तय किया जाए। इसके साथ ही प्याज और लहसुन को भी उनकी लागत के अनुसार उचित कीमत दिलाने की मांग उठाई गई।
इस भजन को किसान व समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने स्वयं लिखा और प्रस्तुत किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान का दर्जा देते हुए उनसे प्रार्थना की गई कि वे किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान करें। गीत में किसानों की पीड़ा, बढ़ती लागत, खाद-बीज के दाम, और फसलों के कम भाव जैसी समस्याओं को भावनात्मक शब्दों में पिरोया गया।
कार्यक्रम में पेटी मास्टर सवाई सिंह मेवाड़ा, ढोलक मास्टर बाला प्रसाद विश्वकर्मा सहित कई किसान कलाकारों ने भाग लिया। सिंह मेवाड़ा, फूल सिंह मेवाड़ा, हीरालाल सहित अन्य किसानों ने भी भजन-कीर्तन के जरिए अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया।
किसानों का कहना है कि वे किसी आंदोलन या विरोध के बजाय शांति और भक्ति के मार्ग से अपनी बात रखना चाहते हैं, ताकि सरकार तक किसानों की वास्तविक स्थिति और समस्याएं पहुंच सकें। किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से अपील की कि वे किसानों की मेहनत का सही मूल्य सुनिश्चित करें, ताकि अन्नदाता आर्थिक रूप से मजबूत हो सके और खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सके।

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