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आदिवासी की भू-दान में मिली जमीन पर गैर आदिवासी का कब्जा, कलेक्टर से शिकायत कब्जा हटाने की मांग, कार्रवाई न होने का लगाया आरोप

जिले के भैसदेही तहसील अंतर्गत ग्राम खैरा निवासी आदिवासी व्यक्ति जिरगा पिता सालकराम को शासन द्वारा वर्ष 1993 में भूमिहीन होने पर भू-दान में खसरा नंबर 83/3 रकबा 2.023 हेक्टेयर भूमि पट्टे पर दी गई थी। जिरगा ने वर्ष 1997-98 तक उक्त भूमि पर खेती की, इसके बाद रोजगार के लिए परिवार सहित भैसदेही चले गए। इस दौरान उनकी अनुपस्थिति का फायदा उठाकर ग्राम आठवा निवासी उदेराम पिता माहू जाति गौली ने उनकी निजी भूमि पर मवेशी रखना शुरू किया और धीरे-धीरे खेती कर मकान बनाकर रहने लगा।
जिरगा के गांव लौटने पर जब उन्होंने अपनी जमीन से कब्जा हटाने को कहा तो उदेराम द्वारा गाली-गलौज, जातिगत शब्दों का प्रयोग और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित आदिवासी ने बताया कि अवैध कब्जे के कारण वह फिर से भूमिहीन हो गया है। इस संबंध में उन्होंने कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और थाना मोहदा में आवेदन दिए, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जनसुनवाई में दिए आवेदन में जिरगा ने स्वयं को अनपढ़ बताते हुए प्रशासन से अपनी भू-दान में मिली निजी भूमि से अवैध कब्जा हटवाने की मांग की है।

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  • Shravan Kumar

    आदिवासी की भू-दान में मिली जमीन पर गैर आदिवासी का कब्जा, कलेक्टर से शिकायत कब बैतूल। जिले के भैसदेही तहसील अंतर्गत ग्राम खैरा निवासी आदिवासी व्यक्ति जिरगा पिता सालकराम को शासन द्वारा वर्ष 1993 में भूमिहीन होने पर भू-दान में खसरा नंबर 83/3 रकबा 2.023 हेक्टेयर भूमि पट्टे पर दी गई थी। जिरगा ने वर्ष 1997-98 तक उक्त भूमि पर खेती की, इसके बाद रोजगार के लिए परिवार सहित भैसदेही चले गए। इस दौरान उनकी अनुपस्थिति का फायदा उठाकर ग्राम आठवा निवासी उदेराम पिता माहू जाति गौली ने उनकी निजी भूमि पर मवेशी रखना शुरू किया और धीरे-धीरे खेती कर मकान बनाकर रहने लगा। जिरगा के गांव लौटने पर जब उन्होंने अपनी जमीन से कब्जा हटाने को कहा तो उदेराम द्वारा गाली-गलौज, जातिगत शब्दों का प्रयोग और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित आदिवासी ने बताया कि अवैध कब्जे के कारण वह फिर से भूमिहीन हो गया है। इस संबंध में उन्होंने कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और थाना मोहदा में आवेदन दिए, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जनसुनवाई में दिए आवेदन में जिरगा ने स्वयं को अनपढ़ बताते हुए प्रशासन से अपनी भू-दान में मिली निजी भूमि से अवैध कब्जा हटवाने की मांग की है।

  • Shravan Kumar

    आदिवासी की भू-दान में मिली जमीन पर गैर आदिवासी का कब्जा, कलेक्टर से शिकायत कब्जा हटाने की मांग, कार्रवाई न होने का लगाया आरोप फोटो - बैतूल। जिले के भैसदेही तहसील अंतर्गत ग्राम खैरा निवासी आदिवासी व्यक्ति जिरगा पिता सालकराम को शासन द्वारा वर्ष 1993 में भूमिहीन होने पर भू-दान में खसरा नंबर 83/3 रकबा 2.023 हेक्टेयर भूमि पट्टे पर दी गई थी। जिरगा ने वर्ष 1997-98 तक उक्त भूमि पर खेती की, इसके बाद रोजगार के लिए परिवार सहित भैसदेही चले गए। इस दौरान उनकी अनुपस्थिति का फायदा उठाकर ग्राम आठवा निवासी उदेराम पिता माहू जाति गौली ने उनकी निजी भूमि पर मवेशी रखना शुरू किया और धीरे-धीरे खेती कर मकान बनाकर रहने लगा। जिरगा के गांव लौटने पर जब उन्होंने अपनी जमीन से कब्जा हटाने को कहा तो उदेराम द्वारा गाली-गलौज, जातिगत शब्दों का प्रयोग और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित आदिवासी ने बताया कि अवैध कब्जे के कारण वह फिर से भूमिहीन हो गया है। इस संबंध में उन्होंने कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और थाना मोहदा में आवेदन दिए, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जनसुनवाई में दिए आवेदन में जिरगा ने स्वयं को अनपढ़ बताते हुए प्रशासन से अपनी भू-दान में मिली निजी भूमि से अवैध कब्जा हटवाने की मांग की है।

  • Shravan Kumar

    आदिवासी की भू-दान में मिली जमीन पर गैर आदिवासी का कब्जा, कलेक्टर से शिकायत कब्जा हटाने की मांग, कार्रवाई न होने का लगाया आरोप