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UGC 26 नियम का हो सकता है दुरूपयोग (उदाहरण है विष्णु तिवारी केस)

आपको याद है विष्णु तिवारी केस? विष्णु पर फेक रेप केस लगाकर ST , SC एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था

करीब 20 साल जेल में रहने के बाद बेगुनाह साबित हुआ, लेकिन उसके दोनों भाई गुजर चुके थे, मां और बाप का देहांत हो गया

वकील की फीस भरने के लिए घर जमीन तक बेचनी पड़ गई, उसकी इस दौरान पढ़ाई भी छूट गई

वहीं चीज अब दोबारा UGC के रूप में अब सरकार के द्वारा पूरे देश में लाया जा रहा है

मतलब मान लीजिए कि कोई मां अपने गहने गिरवी रख कर अपने बच्चे को पढ़ा रही हो, उस पर निजी दुश्मनी या किसी भी अन्य कारण पर बस जातिगत भेदभाव का आरोप लगा दिया जाता है

तो सीधा गिरफ्तारी, जमानत मिलना मुश्किल, सालों तक आप जेल में उस झूठे केस का प्रतिकार करते रहिए

वकीलों की फीस नहीं है तो घर जमीन बेचनी पड़ जाएगी, अगर कोई फिर भी फीस पूरी न दे पाए, तो आरोप ही गुनाह कहलाएगा और आप आजीवन कारावास जैसी सजा उस चीज के लिए गुजारेंगे, जो आपने किया ही नहीं है

सबसे खराब और सड़ा हुआ हिस्सा ये है कि अगर आरोप झूठा निकलता है तो आरोपी को कोई दंड नहीं, कोई जुर्माना नहीं होगा

वो एक शांत जीवन जीएगा, आपकी दुनिया को बर्बाद करके

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