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*शिक्षा नहीं, सत्ता का विस्तार-यूजीसी का नया कानून लोकतंत्र व सामाजिक भाईचारे पर सीधा हमला-विजय छिलरो, जजपा जिला प्रवक्ता*

*नारनौल न्यूज़*
नारनौल 28 जनवरी (घनश्याम गर्ग)
देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को “सुधार” के नाम पर जिस दिशा में धकेला जा रहा है, वह चिंताजनक ही नहीं, खतरनाक भी है।विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए कानून ने साफ कर दिया है कि सरकार का इरादा शिक्षा को सशक्त बनाने का नहीं, बल्कि उसे सत्ता के नियंत्रण में लाने का है। वह उच्च शिक्षा उच्च संस्थानों में सामाजिक समरसता वह भाईचारे के खिलाफ काम करना वह उच्च शिक्षण संस्थानों को नियंत्रण में रखना है। यह कानून उच्च शिक्षा के संघीय ढांचे पर सीधा हमला है।
*जजपा के जिला प्रवक्ता विजय छिलरो ने कहा कि विश्वविद्यालयों और राज्यों से उनके अधिकार छीनकर सब कुछ दिल्ली के अफसरशाही तंत्र के हवाले किया जा रहा है। कुलपतियों की नियुक्ति, पाठ्यक्रम निर्धारण, मान्यता और मूल्यांकन—हर स्तर पर केंद्र का दखल बढ़ाया गया है। सवाल यह है कि क्या विश्वविद्यालय अब ज्ञान के स्वतंत्र केंद्र रहेंगे या सरकार की विचारधारा फैलाने के औज़ार? उन्होंने बताया कि नए कानून के पीछे छिपा असली एजेंडा भी अब ढका नहीं रहा—निजीकरण और बाजारीकरण। सरकारी विश्वविद्यालयों को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है, ताकि निजी संस्थानों के लिए रास्ता साफ हो सके। फीस बढ़ेगी, स्थायी शिक्षक घटेंगे, शोध पर अंकुश लगेगा और शिक्षा अमीरों की बपौती बनती जाएगी।*
जिला जजपा प्रवक्ता ने कहा कि सबसे खतरनाक संकेत यह है कि अकादमिक स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार किया गया है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब सत्ता ने शिक्षा को नियंत्रित करने की कोशिश की है, तब-तब समाज बौद्धिक रूप से कमजोर हुआ है। सरकार शायद यह भूल रही है कि विश्वविद्यालय सत्ता के विस्तार के केंद्र नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रीढ़ होते हैं।अब भी वक्त है। सरकार को अहंकार छोड़कर शिक्षकों, छात्रों और राज्यों की आवाज़ सुननी चाहिए। वरना यह कानून विरोध का नहीं, बल्कि इतिहास के कटघरे का विषय बन जाएगा। इसी कानून के विरोध मे युवा जननायक जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला आने वाली 11 फरवरी को पाली महेंद्रगढ़ स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय पर छात्रों सहित इसका विरोध करेंगे।

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