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UGC के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, पक्षकारों से CJI ने पूछे तीखे सवाल

नई दिल्ली/कानपुर

UGC new regulations : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। उत्तर प्रदेश सहित देश के कई शहरों में विरोध हो रहा है। देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले की सुनवाई हो रही है। पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ से अपने दावे के समर्थन में दलीलें दी जा रही हैं। इस मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ कर रही है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कई तीखे सवाल भी पूछे हैं। सीजेआई ने पूछा कि आजादी के 75 साल बाद भी हम समाज जातियों से मुक्त नहीं कर सके है और अब क्या इस नए कानून से पीछे की ओर जा रहे हैं? इस मामले पर सनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जो टिप्पणियां की हैं,


वे इस प्रकार हैं-
सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ मामले पर आज सुनवाई शुरू हुई। इस दौरान वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि हम यूजीसी के रेगुलेशन के सेक्शन 3 c को चैलेंज कर रहे जिसमें जातिगत भेदभाव की बात की गई है। उन्होंने कहा कि जो परिभाषा रेगुलेशन में भेदभाव की दी गई है वो पूरी तरह से सही नहीं है। संविधान के विपरीत है। संविधान के मुताबिक भेदभाव देश के सभी नागरिकों से जुड़ा है। लेकिन यूजीसी का कानून सिर्फ विशेष वर्ग के प्रति भेदभाव की बात करता है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले जो भी आदेश दिया है ये उस भावना के खिलाफ है। इससे समाज में वैमनस्य बढ़ेगा। ये संविधान में दिए गए समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।
क्या यूजीसी का रेगुलेशन से उसे न्याय मिलेगा?
इस पर CJI ने पूछा कि अगर दक्षिण भारत के किसी छात्र को उत्तर भारत के विश्विद्यालय में एडमिशन मिलता है, उस पर टिप्पणी होती है तो क्या यूजीसी का रेगुलेशन से उसे न्याय मिलेगा। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि इसके लिए अलग से प्रावधान है किसी के जन्मस्थान के आधार पर अगर भेदभाव होता है तो उस पर एक्शन लिया जा सकता है।

रैगिंग के रूल क्यों हटाए गए?
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, यूजीसी के नियम से रैगिंग के रूल क्यों हटाए गए? यूजीसी का नया नियम प्रगतिवादी ने होकर हमें पीछे ले जा रहा है। कल कोई फ्रेशर लड़का जो सामान्य जाति से आता है, वो पहले ही दिन अपराधी बनकर जेल के पीछे चला जाएगा। ऐसा अंदेशा है। इसे लेकर CJI ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, आजादी के 75 साल बाद भी हम समाज जातियों से मुक्त नहीं कर सके हैं.और अब क्या इस नए कानून से पीछे की ओर जा रहे हैं? याचिकाकर्ता ने यूजीसी के रेगुलेशन को समाप्त किए जाने की मांग की और इस पर तुरंत रोक लगाए जाने की मांग की। याचिकाकर्ता ने कहा कि अगर हमें इजाजत मिले तो इससे बेहतर रेगुलेशन बनाकर दे सकते हैं।वहीं, एसजी तुषार मेहता ने कहा कि ये संविधान से जुड़ा मामला है। उसे इसी नजरिए से सुना जाना चाहिए। भारत की एकता हमारे शैक्षणिक संस्थानों में नजर आनी चाहिए। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि हम चाहते है कि कुछ कानूनविदों की कमेटी इसपर विचार करे।

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