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खेती में परमाकल्चर पर कार्यशाला


कोटा के झालीपुरा के समीप खेड़ली पण्ड्या में नव विकसित कौशिक फ़ार्म पर कृषि के क्षेत्र में प्राकृतिक तरीके से खेती को प्रोत्साहन हेतु ,आसपास के किसनों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया । जिसमें किसान मित्र फ़ार्म प्रबंधक अजय कुमार में किसनों को खेती में बढ़ते ,हुए कैमिकल के दुष्परिणामों को बताते हुए परमाकल्चर खेती को प्रोत्साहन को आह्वाहन किया ।उन्होंने बताया कि परमाकल्चर के विषय में बताया कि इसका अर्थ है परमानेंट एग्रीकल्चर अर्थात एक बार प्रारंभ करने के बाद जाकर कभी अंत नहीं है और इसकी उपज यहीं काम आकर हरी भूमि को उपजाऊ बनाती रहती है । बाहर से किसी प्रकार के केमिकल की आवश्यकता नहीं होती है ।
उन्होंने बताया कि खेती में दलहन अवश्य करनी चाहिए इससे खेत को प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन मिलती है जो कि भूमि को अधिक उपजाऊ बनाती है ।इस कार्यशाला में झालीपुरा ,दसलाना,चन्द्रेसल,खेड़ली पण्ड्या आदि गांव के कृषक बृजमोहन सुमन ,राहुल कुमावत,मुकुट सुमन,शैलेंद्र कुमावत,महावीर मीणा,रामावतार मेघवंशी,सुनील कुमावत,आकाश मेघवंशी सहित तीस से अधिक किसानों ने भाग लिया ।कौशिक फ़ार्म की संचालिका प्रभा कौशिक में बताया कि यहाँ लगभग पाँच सो पेड़ लगाये गए हैं जो कि पर्यावरण के लिए बहुत आवशयक हैं ।जिसमें फल दार पेड़ो के अतिरिक्त स्थानीय पेड़ जैसे नीम, कचनार, करंज,शीशम,अमलतास और रोझड़ी जैसे पेड़ भी हैं।इसके साथ ही मौसमी सब्जिया भी लगाई गई हैं ।इनमें कहीं भी किसी प्रकार के केमिकल का उपयोग नहीं किया जाता ।

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