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30 जनवरी से 14 फरवरी तक चलाया जाएगा स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक 74 नये कुष्ठ मरीज खोजे गये

आगरा । जिले में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि (30 जनवरी) से स्पर्श कुष्ठ जागरुकता अभियान शुरू होगा, जो 14 फरवरी तक चलेगा। सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर शपथ ली जाएगी और लोगों को कुष्ठ रोग के प्रति जागरूक किया जाएगा। इस दौरान कुष्ठ आश्रम में रहने वाले कुष्ठ रोगियों को एमसीआर चप्पल, कॉटन, गौज, सेल्फ केयर किट और दवाएं आदि वितरित की जाएंगी ।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरूण श्रीवास्तव ने बताया कि 30 जनवरी को बापू की पुण्यतिथि पर स्पर्श कुष्ठ जागरुकता अभियान संचालित होगा, जो 14 फरवरी तक चलेगा। इस जागरूकता अभियान के अवसर पर जनपद में ब्लॉक स्तर पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम होंगे। सीएमओ ऑफिस, सभी प्रशासनिक अधिकारी और ग्राम प्रधानों द्वारा जिलाधिकारी का संदेश जनता को पढ़कर सुनाया जाएगा और जागरूकता संबंधित अपील की जाएगी। ग्राम पंचायत और ग्राम सभा के अंतर्गत जगह-जगह पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए जाएंगे। स्पर्श कुष्ठ जागरूकता से संबंधित कार्यक्रम स्कूल में आयोजित किए जाएंगे । अभियान को सफल बनाने के लिए सभी एकजुट होकर जन समुदाय को जागरूक करके कुष्ठ को हराकर मुक्ति पा सकते हैं।


जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. जितेन्द्र कुमार लवानिया ने बताया कि ने बताया कि 30 जनवरी से 13 फरवरी तक स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। अभियान के दौरान आमजन को कुष्ठ रोग के प्रति जागरूक किया जाएगा। कुष्ठ रोग माइक्रो वेक्टीरियम लैप्री नामक जीवाणु से होता है। यह आनुवांशिक एवं छुआछूत रोग नहीं है। समय से जांच और उपचार कराने से दिव्यांगता से भी बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग की दवा सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध होती है। उन्होंने बताया कि जनपद में अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक 74 नये कुष्ठ मरीज खोजे गये हैं। जिसमें पीबी-(पॉसी बेसिलरी) 15 और एमबी- (मल्टी बेसिलरी) 59 हैं। सभी का इलाज शुरू कर दिया गया है।


त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. ध्रुव गोपाल ने बताया कि राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत कुष्ठ मुक्त भारत का सपना साकार करने के लिए कुष्ठ रोगियों के परिवार के स्वस्थ व्यक्तियों व उसके आस-पास के 10 घरों के स्वास्थ व्यक्तियों के (कॉन्टेक्टस) को कुष्ठ रोग से सुरक्षित रखने के लिए रिफामपसिन दवा की सिगल सुपरवाइज्ड डोज दिया जाना प्रारंभ किया गया है। इस रिफामपसिन दवा की मात्रा सिगल डोज बैक्टीरिया को 99.99 प्रतिशत खत्म कर देती है। इस दवा का व्यक्ति पर कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता है।
डॉ. ध्रुव गोपाल ने बताया शारीरिक विकृति और कुरुपता ही कुष्ठ रोग के बारे में भय और सामाजिक घृणा का मूल कारण है। जल्द निदान और नियमित इलाज से कुष्ठरोग के कारण होने वाली विकृतियों से बचा जा सकता है। इसी प्रकार कुष्ठ रोग का निर्मूलन बहुत आसानी से हो सकता है। सिर्फ सभी का साथ और सहयोग चाहिए।
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कुष्ठ रोग के सामान्य लक्षण
• शरीर का कोई भी दाग धब्बा जिस पर सुन्नपन हो, उसमें खुजली ना हो,उसमें पसीना ना आता हो कुष्ठ रोग हो सकता है
• शरीर की संवेदना वाहक नसों में मोटापन व दर्दीलापन कुष्ठ रोग का लक्षण हो सकता है। जांच व इलाज ना कराने पर विकलांगता आ सकती है।
• कान की पाली का मोटा होना व कान पर गांठे होना।

यह है लक्षण
• शरीर का कोई भी दाग धब्बा जिस पर सुन्नपन हो
• उसमें खुजली न हो, पसीना न आता हो, कुष्ठ रोग हो सकता है
• कान पर गांठे होना,
• हथेली और तलवों पर सुन्नपन हो
उपचार---
पीबी- (पॉसी बेसिलरी) छह माह तक इलाज
एमबी- (मल्टी बेसिलरी) 12 माह तक इलाज

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