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*हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में दो दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय वैदिक संगोष्ठी का होगा आयोजन*

*नारनौल न्यूज़*
*कुलपति ने जारी की विवरणिका*
नारनौल 30 जनवरी (घनश्याम गर्ग) हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेन्द्रगढ़ की स्वामी दयानन्द सरस्वती पीठ तथा केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आगामी 18-19 फरवरी को दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वैदिक संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। ‘भारतीय ज्ञान परम्परा में चिन्तन के आयाम एवं युगद्रष्टा महर्षि दयानन्द सरस्वती‘ विषय पर केंद्रित यह संगोष्ठी हाइब्रिड मोड में आयोजित होगी।
*हकेवि के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने संगोष्ठी की विवरणिका जारी की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा, कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार तथा मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान पीठ की अधिष्ठाता व संगोष्ठी की निदेशक प्रो. पायल कंवर चन्देल भी उपस्थित रहीं। हकेवि के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने संगोष्ठी की विवरणिका जारी करते हुए कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परम्परा की समृद्ध विरासत तथा महर्षि दयानन्द सरस्वती के वैदिक चिन्तन को वर्तमान समय के संदर्भ में प्रस्तुत करना है।*
उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी देश-विदेश के विद्वानों एवं प्रतिभागियों को भारतीय संस्कृति और परम्परा को समझने का अवसर प्रदान करेगी। कुलपति ने कहा कि यह संगोष्ठी भारतीय ज्ञान परम्परा और महर्षि दयानन्द के विचारों को वैश्विक मंच पर नई दृष्टि से प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण अकादमिक प्रयास सिद्ध होगी। संगोष्ठी में ’वेद, उपनिषद, दर्शन, साहित्य, शिक्षा, योग, पर्यावरण’ सहित अनेक विषयों पर चर्चा की जाएगी। महर्षि दयानन्द सरस्वती के ’वेदों की ओर लौटो’ के संदेश की समकालीन प्रासंगिकता पर विशेष विमर्श होगा। इसके अतिरिक्त सामाजिक सुधार, नैतिक मूल्यों तथा राष्ट्रचेतना जैसे विषयों पर भी विचार किया जाएगा। महर्षि दयानन्द की प्रसिद्ध कृति ‘सत्यार्थ प्रकाश’ के दार्शनिक मूल्यांकन को भी प्रमुख विषय के रूप में शामिल किया गया है।
*स्वामी दयानन्द सरस्वती पीठ की पीठाध्यक्ष एवं संगोष्ठी की संयोजक डॉ. सुमन रानी ने बताया कि संगोष्ठी के लिए देश-विदेश के विद्वानों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया प्राप्त हो रही है। इस संगोष्ठी के सचिव डॉ. विक्रम सिंह व डॉ. इंदु बाला हैं। संगोष्ठी हेतु शोधपत्र संस्कृत, हिन्दी अथवा अंग्रेज़ी भाषा में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। चयनित शोधपत्रों को आईएसबीएन युक्त संपादित ग्रंथ में प्रकाशित किया जाएगा। संगोष्ठी के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है।*

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