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कपकपाती ठंड, भूख और संघर्ष की जीत: मुख्य सचिव के वादे पर शांत हुआ किसानों का आक्रोश खेतों में दबी उम्मीदों को मिला सरकारी आश्वासन का सहारा;

कपकपाती ठंड, भूख और संघर्ष की जीत: मुख्य सचिव के वादे पर शांत हुआ किसानों का आक्रोश
​खेतों में दबी उम्मीदों को मिला सरकारी आश्वासन का सहारा; 15 फरवरी तक होगा नुकसान की भरपाई का भुगतान
​मल्लां वाला खास (जोगिंदर सिंह खालसा):
अपनी उजड़ी हुई फसलों और रेत में दफन हो चुके खेतों का इंसाफ मांगने के लिए हरिके हेडवर्क्स की सर्द रातों में डटे अन्नदाता की आखिर सुनवाई हो गई। एक महीने से जारी 'बाढ़ पीड़ित किसान संघर्ष मोर्चा' आज इस उम्मीद के साथ स्थगित कर दिया गया कि सरकार अपने वादे के मुताबिक 15 फरवरी तक किसानों के खाली हो चुके खातों में मुआवजे की राशि डाल देगी।
​भावुक कर देने वाला संघर्ष:
यह आंदोलन सिर्फ नारेबाजी का नहीं था, बल्कि उन पिताओं का था जिनके बच्चों की पढ़ाई दांव पर थी और उन बेटों का था जिनके बुजुर्ग बीमार थे। कड़ाके की ठंड में जब लोग घरों में दुबके थे, तब किसान भूख हड़ताल पर बैठकर सरकार के जमीर को जगा रहे थे।
​सरदार जसवीर सिंह आहलूवालिया और उनकी टीम ने कहा कि 2025 की बाढ़ ने उनकी रूह तक को छलनी कर दिया था। किसानों की मांग है कि खेतों से रेत हटाने की मोहलत दी जाए और मुआवजा बिना किसी भ्रष्टाचार के सीधे बैंक खातों में पहुंचे।
​हुंकार: किसानों ने जाते-जाते सरकार को चेताया है कि वे घर जरूर जा रहे हैं, लेकिन हल अभी भी कंधों पर हैं। अगर 24 फरवरी तक वादे वफा न हुए, तो संघर्ष की अगली इबारत और भी सख्त होगी।

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