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विशेष रिपोर्ट: स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था,

विशेष रिपोर्ट: स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था, मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
​नारनौल: हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के गृह जिले में ही स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। नागरिक अस्पताल नारनौल में आने वाले मरीजों को इलाज से ज्यादा अस्पताल के चक्कर काटने में पसीना बहाना पड़ रहा है। व्यवस्था का आलम यह है कि लोग 'पुरानी बिल्डिंग' और 'नई बिल्डिंग' के बीच फुटबॉल बनकर रह गए हैं।
​क्या है मुख्य समस्या?
​अस्पताल प्रशासन की ओर से ओपीडी और अन्य सेवाओं को नई और पुरानी बिल्डिंग में बांट दिया गया है, लेकिन इनके बीच तालमेल की भारी कमी है।
​दूरी का संकट: मरीजों को पर्ची कटवाने के लिए एक बिल्डिंग जाना पड़ता है, तो डॉक्टर को दिखाने के लिए दूसरी बिल्डिंग की दौड़ लगानी पड़ती है।
​बुजुर्गों और गंभीर मरीजों की आफत: बिना किसी पुख्ता सूचना बोर्ड या गाइडेंस के, गंभीर रूप से बीमार लोग और बुजुर्ग तीमारदारों के सहारे घंटों भटकते रहते हैं।
​समय की बर्बादी: एक छोटे से चेकअप के लिए भी मरीजों का पूरा दिन इसी भागदौड़ में निकल जाता है।
​पीड़ित की जुबानी: "हम इलाज कराने आएं हैं या चक्कर काटने?"
​अस्पताल में मौजूद एक पीड़ित ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया:
​"हमें समझ ही नहीं आता कि कौन सा कमरा कहाँ है। पुरानी बिल्डिंग में जाओ तो कहते हैं नई वाली में जाओ, वहाँ जाओ तो वापस भेज देते हैं। स्वास्थ्य मंत्री जी का अपना जिला है, कम से कम यहाँ तो व्यवस्था सुचारू होनी चाहिए। गरीब आदमी धक्के खाने को मजबूर है।"
​ग्राउंड रिपोर्ट का निष्कर्ष
​हैरानी की बात यह है कि जब जिले की कमान खुद प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के हाथों में हो, तब भी प्रशासनिक ढुलमुल रवैया आम जनता पर भारी पड़ रहा है। नई बिल्डिंग बनने के बाद उम्मीद थी कि सुविधाएं बेहतर होंगी, लेकिन फिलहाल यह केवल 'भ्रम का केंद्र' बनकर रह गई है।

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