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उत्तर प्रदेश में भूमि संबंधी शिकायतों पर जमीन पर न्याय या सिर्फ कागजों पर आदेश एवं निस्तारण

🔴 BIG QUESTION ?

ज़मीन पर न्याय या सिर्फ काग़ज़ी आदेश?

कौशांबी | यूपी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भू-माफिया के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति की लगातार बात की जाती है। कई नियम बनाए गए साथ ही सरकार का स्पष्ट आदेश है कि अवैध कब्जे हटाए जाएँ, पीड़ितों को उनकी ज़मीन दिलाई जाए और दोषियों पर सख़्त कार्रवाई हो।
लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट तस्वीर दिखा रही है। आम जनमानस की भूमि तो दूर की बात है शिकायतों के बावजूद तहसील एवं जिला प्रशासन सरकारी संपति वा संरक्षित भूमि को ही क़ब्ज़ा मुक्त नहीं करवा रहे हैं।
जनपद कौशांबी में सामने आए कई मामलों में आरोप है कि
➡️जिला एवं तहसील स्तर पर लिखित शिकायत एवं रजिस्टर्ड पोस्ट पर भेजी गयी शिकायतों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जाती
➡️ IGRS पर दिए जाने वाली शिकायत पर ज़िला-तहसील स्तर पर फर्जी आख्या लगाई जा रही है
➡️ IGRS शिकायतों का काग़ज़ी निस्तारण किया जा रहा है
➡️शिकायत कर्ता को इतना दौड़ाया जाता है कि मजबूरन उसे कोर्ट का सहारा लेना पड़ता है जिसमें लोगों को पीढ़ियों मुकदमे का दंश झेलना पड़ता है
➡️ पीड़ितों को बार-बार “सिविल कोर्ट” का हवाला देकर टरकाया जा रहा है
सबसे बड़ा सवाल यह है कि
अगर सरकार के आदेश सिर्फ फाइलों, भाषणों और सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित रह जाएँ
और ज़मीन आज भी भू-माफियाओं के कब्जे में हो —
तो इसे गुड गवर्नेंस कैसे कहा जा सकता है?
अब सवाल आदेश का नहीं,
आदेश के ज़मीनी पालन का है।
📍 ग्राउंड रिपोर्ट | उत्तर प्रदेश
आनन्द कुमार त्रिपाठी

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