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“टीचर्स ऑफ बिहार” समूह आज केवल एक राज्य-स्तरीय पहल नहीं, बल्कि देशभर के शिक्षकों के लिए प्रेरणा का मॉडल बन चुका है।

प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी के रूप में राष्ट्रीय स्तर तक अपनी सशक्त पहचान बना चुका “टीचर्स ऑफ बिहार” समूह आज केवल एक राज्य-स्तरीय पहल नहीं, बल्कि देशभर के शिक्षकों के लिए प्रेरणा का मॉडल बन चुका है।

इस अवसर पर डाॅ. चंदन श्रीवास्तव, शैक्षिक समन्वयक, भारतीय भाषा समिति, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार ने कहा कि-- "टीचर्स ऑफ बिहार शिक्षकों को निरंतर सीखने, नवाचार अपनाने और आपसी सहयोग के माध्यम से सशक्त करने का उत्कृष्ट उदाहरण है।"
यह समूह जमीनी स्तर पर शिक्षकों की सहभागिता को बढ़ाते हुए, कक्षा-कक्ष तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के प्रभाव को स्पष्ट रूप से दिखाता है। डिजिटल माध्यमों का रचनात्मक उपयोग और शिक्षक-नेतृत्व आधारित कार्यशैली इसे एक आदर्श Professional Learning Community (PLC) के रूप में स्थापित करती है।

वहीं श्री संजय कुमार, उप निदेशक, राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद् (SCERT) ने कहा कि-- "टीचर्स ऑफ बिहार ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब शिक्षक संगठित होकर साझा लक्ष्य के साथ आगे बढ़ते हैं, तो शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।"
यह मंच न केवल शिक्षकों के व्यावसायिक विकास को गति देता है, बल्कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप नवाचार, शोध और अनुभव साझा करने की संस्कृति को भी मजबूती प्रदान करता है।

दोनों वक्ताओं ने एक स्वर में यह स्वीकार किया कि टीचर्स ऑफ बिहार आज शिक्षक सशक्तिकरण, सहयोगात्मक अधिगम और शैक्षिक नवाचार का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है, जिसकी पहचान अब राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो चुकी है और भविष्य में यह राज्य ही नहीं बल्कि देश की शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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