सफीदों में हुआ गैस का भारी संकट,चल रहा ब्लैक का खेल,नहीं हो रही कोई सुनवाई चल रही है मनमानी।
सफीदों, (सचिन गर्ग): सफीदों क्षेत्र में घरेलू गैस सिलेंडरों को लेकर हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। स्थिति यह है कि लोगों को बुकिंग कराने के बाद भी 15-15 दिनों तक गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा। आम उपभोक्ता गैस एजेंसियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उनकी सुनवाई कहीं नहीं हो रही। सफीदों में कार्यरत दोनों गैस एजेंसियां गैस की आपूर्ति पीछे से न आने का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही हैं। लोगों का कहना है कि पहले उन्होंने एक-दूसरे से गैस मांग कर काम चलाने की कोशिश की, लेकिन अब वह विकल्प भी खत्म हो चुका है। मजबूरी में कई परिवार ब्लैक में सिलेंडर खरीदने को मजबूर हो रहे हैं, जहां घरेलू गैस सिलेंडर 1200 से 1400 रुपये तक धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। जबकि एजेंसी में होम डिलीवरी के लिए सिलेंडर का निर्धारित रेट 861 रुपये है।
ग्राहकों का आरोप है कि होम डिलीवरी के नाम पर उनसे 861 रुपये की जगह 865 रुपये वसूले जा रहे हैं। यही नहीं, अब एजेंसियों द्वारा उपभोक्ताओं को एजेंसी से स्वयं आकर या तय किए गए प्वाइंट से सिलेंडर उठाने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जबकि उनसे पूरे होम डिलीवरी चार्ज किए जा रहे हैं। बताया जाता है कि 861 रुपये में 20 रुपये होम डिलीवरी चार्ज शामिल होता है, इसके बावजूद डिलीवरी घर तक नहीं पहुंचाई जा रही। ग्रामीण उपभोक्ताओं ने बताया कि वे अपने घर के काम छोड़कर सुबह की गैस एजेंसियों के बाहर लाईन में आकर खड़े हो जाते हैं लेकिन कुछ सिलेंडर बांटकर यह कह दिया जाता है कि गैस खत्म हो गई है और उन्हे निराश होकर खाली हाथ घर को लौटना पड़ता है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि जैसे ही गैस की गाड़ी सफीदों पहुंचती है, एजेंसी के बाहर भारी भीड़ जमा हो जाती है। सिलेंडर पाने की होड़ में मारामारी जैसे हालात बन जाते हैं। इससे महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दोनों गैस एजेंसियों की मनमानी पर सख्ती से रोक लगाई जाए और क्षेत्र में नियमित गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी मांग की गई है कि यदि सिलेंडर घर तक पहुंचे तो ही होम डिलीवरी चार्ज लिया जाए, और अगर उपभोक्ता एजेंसी से सिलेंडर उठाने को मजबूर हों तो होम डिलीवरी शुल्क काटा जाए। लोगों का कहना है कि सुलभ और पारदर्शी गैस व्यवस्था ही आम जनता को राहत दिला सकती है।