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मित्रता के तीन नियम


यदीच्छेत् विपुलां मैत्री तत्र त्रीणि न कारयेत्।
विवादमर्थसम्बन्धं परोक्षे दारभाषणम्॥

जो गहरी मित्रता चाहता है, उसे ये तीन बातें नहीं करनी चाहिए

1. मित्र के साथ विवाद ( झगड़ा या बहस )

2. मित्र के साथ पैसे का संबंध ( उधार-लेन-देन या व्यापार )

3. मित्र की अनुपस्थिति में उसकी पत्नी के साथ बातचीत।


ये तीनों स्थितियाँ छोटी-छोटी बातों से बड़े मतभेद पैदा कर सकती हैं।

विवाद से अहंकार टकराता है, धन-संबंध से लालच या विश्वासघात का डर रहता है

और तीसरी बात से संदेह की आग लग सकती है—भले ही इरादा कितना भी शुद्ध क्यों न हो।

इसलिए इनसे बचकर मित्रता को मजबूत और निष्कपट रखें।

सच्चा मित्र वही है जो समय पर साथ दे, लेकिन इन सीमाओं का सम्मान भी करे।

मित्रता में दूरी बनाए रखना ही निकटता को स्थायी बनाता है।

अंत में यही समझें कि मित्रता भावनाओं से अधिक समझदारी पर टिकी होती है

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