हनी ट्रैप का सच उजागर करने पर फतेहगंज पूर्वी के अधिवक्ता को जान से मारने की धमकी, एसएसपी से लगाई सुरक्षा की गुहार।
फतेहगंज पूर्वी।कथित हनी ट्रैप मामले का खुलासा करने वाले अधिवक्ता ने अपनी जान को खतरा बताते हुए थाना फतेहगंज पूर्वी में प्रार्थना पत्र दिया है। अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा ने आरोप लगाया है कि कथित गौ रक्षक विनोद राठौर उन्हें हत्या की धमकी दे रहा है।
अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा ने बताया कि वह बरेली न्यायालय में प्रैक्टिस करते हैं और ‘काली स्याही’ नाम से उनकी निजी प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी भी है। उनके अनुसार, फरीदपुर विधानसभा से विधायक रहे स्व. डॉ. श्याम बिहारी ने एक सभा के दौरान उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलकर अपने एक निजी कार्य के लिए जासूसी कराने की बात कही थी। हालांकि, आठ दिन बाद ही विधायक श्याम बिहारी का हार्ट अटैक से निधन हो गया।
अधिवक्ता का कहना है कि विधायक के निधन के बाद उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर अश्लील वीडियो वायरल किए गए। मामले की जांच करने पर सामने आया कि स्व. विधायक हनी ट्रैप का शिकार हुए थे। आरोप है कि विनोद राठौर और उसकी एक महिला सहयोगी ने मिलकर विधायक को ब्लैकमेल किया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
अधिवक्ता ने जब इस सच्चाई को सोशल मीडिया के माध्यम से सामने रखा तो विनोद राठौर ने व्हाट्सएप कॉल कर उनकी हत्या करवाने की धमकी दी। इससे भयभीत होकर अधिवक्ता ने थाना फतेहगंज पूर्वी के साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बरेली अनुराग आर्य से जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
बताया जा रहा है कि आरोपित विनोद राठौर इससे पहले भी विवादों में घिर चुका है। महाराणा प्रताप पर की गई उसकी अशोभनीय टिप्पणी के बाद फरीदपुर के अधिवक्ता ओमेंद्र सिंह चौहान ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि केस दर्ज होने से बौखलाए विनोद राठौर ने भरे बाजार अधिवक्ता पर गाड़ी चढ़ाने का प्रयास किया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। घटना से आक्रोशित भीड़ ने आरोपित की कार में जमकर तोड़फोड़ कर दी थी। इसके बाद अधिवक्ता ओमेंद्र सिंह चौहान ने आरोपित के खिलाफ दूसरा मुकदमा भी दर्ज कराया था।
इसके बावजूद आरोपित के हौसले बुलंद हैं और अब वह फतेहगंज पूर्वी के अधिवक्ता को खुलेआम जान से मारने की धमकी दे रहा है। लगातार गंभीर आरोपों और मुकदमों के बाद भी अब तक गिरफ्तारी न होना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। लोग इसे पुलिस की कमजोरी मानें या राजनीतिक संरक्षण का असर, जिसके दम पर आरोपित बेखौफ घूम रहा है। मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और पुलिस के लिए यह एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।