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ओम बन्ना मंदिर में बुलेट की पूजा, आस्था और विश्वास का अद्भुत संगम

राजस्थान के पाली ज़िले के देसूरी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित प्रसिद्ध ओम बन्ना मंदिर (बुलेट बाबा मंदिर) आज भी श्रद्धा और विश्वास का अनोखा केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर स्वर्गीय ओम सिंह राठौड़, जिन्हें श्रद्धालु प्रेम से ओम बन्ना कहते हैं, की स्मृति में स्थापित है।
कहा जाता है कि वर्ष 1988 में इसी स्थान पर एक सड़क दुर्घटना में ओम सिंह राठौड़ का निधन हो गया था। दुर्घटना के बाद जब उनकी रॉयल एनफील्ड बुलेट मोटरसाइकिल को पुलिस थाने ले जाया गया, तो वह रहस्यमयी तरीके से बार-बार अपने आप वापस घटनास्थल पर आ जाती थी। इस घटना को लोगों ने चमत्कार माना और यहीं से इस स्थान पर बुलेट की पूजा की परंपरा शुरू हुई।
आज मंदिर में रखी गई वही बुलेट श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। भक्तजन बुलेट पर फूल-माला चढ़ाते हैं, अगरबत्ती जलाते हैं और नारियल अर्पित करते हैं। खासकर वाहन चालक यहां रुककर दर्शन करते हैं और सुरक्षित यात्रा की प्रार्थना करते हैं। कई लोग मानते हैं कि यहां दर्शन करने से दुर्घटनाओं से रक्षा होती है।
आज पत्रकार प्रमोद भार्गव ने स्वयं ओम बन्ना मंदिर पहुंचकर दर्शन किए और अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में पहुंचते ही एक अलग ही सकारात्मक ऊर्जा और शांति का अनुभव होता है। बुलेट के सामने खड़े होकर ऐसा महसूस होता है मानो यह स्थान केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि श्रद्धा और विश्वास की जीवंत कहानी है।
प्रमोद भार्गव के अनुसार, “यहां आने वाला हर व्यक्ति किसी न किसी विश्वास के साथ आता है। चाहे वह वाहन चालक हो या सामान्य श्रद्धालु, सभी के मन में एक ही भावना रहती है—यात्रा सुरक्षित रहे।” मंदिर में दिन-रात श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है और यह स्थान राजस्थान की लोक आस्था का प्रमुख प्रतीक बन चुका है।
ओम बन्ना मंदिर आज भी विज्ञान और आस्था के बीच एक रहस्यमयी पुल बनकर खड़ा है, जहां बुलेट की पूजा अपने आप में अनोखी परंपरा है और जो हर आने वाले को सोचने पर मजबूर कर देती है।

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