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ई-रिक्शा चालकों का हल्लाबोल: नगर

ई-रिक्शा चालकों का हल्लाबोल: नगर निगम पर लगाया अवैध वसूली का आरोप, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी
​[शहर का नाम], [आज की तारीख]: शहर में ई-रिक्शा चालकों ने नगर निगम प्रशासन और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सैकड़ों की संख्या में चालकों ने प्रदर्शन किया, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था कुछ समय के लिए पूरी तरह चरमरा गई। चालकों का स्पष्ट आरोप है कि नगर निगम के अधिकारी उन्हें अनावश्यक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।
​प्रमुख माँगें और प्रशासन पर आरोप
​प्रदर्शनकारी चालकों ने केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष अपनी मांगों को प्रमुखता से रखा। उनकी मुख्य माँगें निम्नलिखित हैं:
​सरल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया: चालकों की मांग है कि जितने भी पुराने ई-रिक्शा हैं, उनका रजिस्ट्रेशन केवल आधार कार्ड की प्रति के आधार पर किया जाए ताकि कागजी जटिलताओं से बचा जा सके।
​सस्ता ड्राइविंग लाइसेंस: चालकों ने मांग की है कि जिनके पास लाइसेंस नहीं है, उनके लिए न्यूनतम शुल्क पर लाइसेंस बनवाने की विशेष व्यवस्था की जाए।
​अवैध वसूली पर रोक: चालकों का आरोप है कि नगर निगम पार्किंग के नाम पर 1300 रुपए वसूलता है, लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिलता। उन्होंने इस वसूली को 'अवैध' बताते हुए इसे तत्काल बंद करने की मांग की।
​"हमसे पैसे तो लिए जाते हैं, लेकिन शहर के किसी भी ब्लॉक या प्रमुख चौराहे पर ई-रिक्शा के लिए कोई निर्धारित पार्किंग स्थल नहीं है। हमें सड़कों पर खड़ा होना पड़ता है, जहाँ अधिकारी हमें परेशान करते हैं।" — एक प्रदर्शनकारी चालक
​उग्र आंदोलन की चेतावनी
​ई-रिक्शा चालकों ने जिला प्रशासन, नगर प्रशासन और बिहार सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि भविष्य में होने वाले किसी भी विरोध प्रदर्शन और उससे उत्पन्न होने वाली स्थितियों की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
​यातायात पर पड़ा असर
​प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ई-रिक्शा सड़कों पर उतर आए, जिसके कारण प्रमुख चौक-चौराहों पर लंबा जाम लग गया। आम जनता को आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि, चालकों का कहना है कि वे अपनी रोजी-रोटी और सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं और प्रशासन की बेरुखी ने उन्हें सड़कों पर उतरने को मजबूर किया है।

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