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जितेन्द्र जायसवाल नागदा जिला उज्जैन मध्य प्रदेश झूठे आरोपों पर न्यायालय की कड़ी चोट — ग्रेसिम का निषेधाज्ञा वाद खारिज

झूठे आरोपों पर न्यायालय की कड़ी चोट — ग्रेसिम का निषेधाज्ञा वाद खारिज
नागदा स्थित ग्रेसिम इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड द्वारा दायर स्थायी निषेधाज्ञा संबंधी दीवानी वाद क्रमांक RCS-A/39/2019 में व्यवहार न्यायालय, वरिष्ठ खंड नागदा ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कंपनी का वाद निरस्त कर दिया।

वाद में कंपनी ने आरोप लगाया था कि अक्टूबर 2019 में श्रमिक पक्ष के रमेश गौतम, अशोक मीणा, जुझार सिंह, रतन सिंह, कमलेश एवं दीनदयाल सहित अन्य व्यक्तियों द्वारा पावर हाउस गेट क्रमांक-2 तथा मुख्य मार्ग के आसपास धरना-प्रदर्शन कर ट्रकों, कच्चे-तैयार माल की आवाजाही बाधित की गई तथा कर्मचारियों को कार्य पर आने-जाने से रोका गया, जिससे उत्पादन व जनसुविधाएँ प्रभावित हुईं।

प्रतिवादी श्रमिकों ने न्यायालय में स्पष्ट कहा कि आरोप असत्य एवं बढ़ा-चढ़ाकर लगाए गए हैं। उनके अनुसार सार्वजनिक मार्ग अवरुद्ध नहीं किया गया तथा श्रमिकों की वैधानिक मांगों को लेकर शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक अधिकारों के तहत विरोध किया गया था, जबकि किसी भी प्रकार की क्षति, मारपीट या अवरोध का ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के कथनों एवं दस्तावेजों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने पाया कि कंपनी अपने आरोप प्रमाणित करने में विफल रही तथा कथित अवरोध या क्षति सिद्ध नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप न्यायालय ने स्थायी निषेधाज्ञा देने से इंकार करते हुए वाद को निरस्त कर दिया।

यह निर्णय श्रमिक अधिकारों, शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक संरक्षण तथा न्यायालय में ठोस प्रमाण की अनिवार्यता को रेखांकित करने वाला महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।

उक्त जानकारी
एस. के. साहू, अधिवक्ता
अभय चोपड़ा द्वारा दी गई

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