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रेलवे के विकास कार्य में रोडा बना उचित मुआवजा


उचित मुआवजे के बिना अटका रेलवे का विकास कार्य।
नया बस्ती में रेल लाइन विस्तार बना विवाद का कारण।
मुआवजे पर बात नही होने से ग्रामीणों में रोष।

राउरकेला:भारतीय रेल द्वारा चलाए जा रहे विकास कार्य के तहत सुंदरगढ़ जिले के बिसरा प्रखंड अंतर्गत संतोषपुर ग्राम पंचायत क्षेत्र के नया बस्ती से होकर नई रेल पटरी बिछाने का कार्य प्रगति पर है। रेलवे की ओर से बस्ती तक मिट्टी पटान का कार्य भी लगभग पूरा कर लिया गया है, लेकिन प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा नहीं मिलने के कारण परियोजना विवादों में घिरती नजर आ रही है।
मुआवजा न मिलने से असंतोष
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जिन मकानों को तोड़ा जाना है, उनके एवज में अब तक तय मुआवजा राशि नहीं दी गई है। इससे मकान मालिक गहरे असंतोष और मानसिक तनाव में हैं। कई परिवारों की महिलाओं ने भी आशंका जताई है कि उन्हें अधिकारियों की ओर से अप्रत्यक्ष दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे वे भयभीत हैं।
प्रभावित लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि रेलवे द्वारा निर्धारित मुआवजा राशि उन्हें पारदर्शी तरीके से दे दी जाए, तो वे स्वेच्छा से अपनी जमीन और मकान खाली करने को तैयार हैं। उनका कहना है कि वे विकास कार्य में बाधा नहीं बनना चाहते, बल्कि केवल अपने अधिकार का उचित प्रतिफल चाहते हैं।
मुआवजा प्रक्रिया में उलझन
मामला तब और जटिल हो गया है जब मुआवजे की संभावित “मोटी रकम” की चर्चा के बाद कुछ ऐसे रिश्तेदार भी हिस्सेदारी का दावा करने लगे हैं, जो पहले ही परिवार से अलग हो चुके हैं। इतना ही नहीं, कुछ जमीनों पर तीसरे पक्ष द्वारा भी मालिकाना हक का दावा किया जा रहा है, जिससे मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में कानूनी और प्रशासनिक पेच फंसते दिख रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक ओर रेलवे परियोजना को समय पर पूरा करना और दूसरी ओर वास्तविक प्रभावित परिवारों को न्यायसंगत एवं पारदर्शी मुआवजा सुनिश्चित करना।
विकास बनाम अधिकार
नया बस्ती क्षेत्र में रेल लाइन विस्तार से भविष्य में यातायात और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है, लेकिन यदि मुआवजा विवाद जल्द नहीं सुलझाया गया तो विकास कार्य प्रभावित हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सर्वेक्षण और स्वामित्व सत्यापन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर वास्तविक हकदारों को भुगतान किया जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन और रेलवे विभाग मिलकर इस संवेदनशील मुद्दे का समाधान कितनी शीघ्रता और निष्पक्षता से कर पाते हैं।

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