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प्रो हॉकी लीग: राउरकेला चरण में भारत का निराशाजनक प्रदर्शन

एफआईएच प्रो लीग के राउरकेला चरण में भारतीय पुरुष हॉकी टीम का प्रदर्शन उम्मीदों के विपरीत अत्यंत निराशाजनक रहा। घरेलू समर्थन और बड़ी अपेक्षाओं के बावजूद टीम का खेल स्तर आशाओं से काफी नीचे रहा।
2020 टोक्यो और 2024 पेरिस ओलिंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद भारतीय हॉकी से उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं। लेकिन बिरसा मुंडा हॉकी स्टेडियम में 10 से 15 फरवरी के बीच खेले गए मुकाबलों में भारत को चारों मैचों में हार का सामना करना पड़ा।
भारत बेल्जियम से 3-1 और 4-2 तथा अर्जेंटीना से 8-0 और 4-2 से पराजित हुआ। विशेष रूप से अर्जेंटीना के खिलाफ 0-8 की हार ने टीम के प्रदर्शन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। इससे पहले 2010 के दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को ऐसी ही बड़ी शिकस्त दी थी।
पिछले वर्ष प्रो लीग में भारत नौ देशों में आठवें स्थान पर रहा था। इस बार घरेलू मैदान पर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन राउरकेला चरण में दर्शकों को हार से ज्यादा हारने के तरीके ने निराश किया। चारों मैचों में टीम तालमेल और लय के अभाव से जूझती दिखी।
सबसे बड़ी कमजोरी डिफेंस रही। विरोधी टीमों ने तेज काउंटर अटैक और सटीक पासिंग के दम पर भारतीय रक्षा पंक्ति को बार-बार भेदा। चार मैचों के कुल 240 मिनट के खेल में मुश्किल से 30-40 मिनट ही भारतीय टीम की चमक दिखाई दी। चार मैचों में भारत केवल पांच गोल कर सका, जबकि उसके खिलाफ 19 गोल हुए।
सकारात्मक पक्ष की बात करें तो फारवर्ड आदित्य ललागे और मिडफील्डर हार्दिक सिंह का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। उपकप्तान हार्दिक सिंह ने पूरे मैदान में ऊर्जा के साथ खेल दिखाया, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। कप्तान हरमनप्रीत सिंह फीके नजर आए और अर्जेंटीना के खिलाफ पेनाल्टी स्ट्रोक भी चूक गए। अमित रोहिदास, मनदीप सिंह और अभिषेक जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों का योगदान भी अपेक्षित स्तर का नहीं रहा। गोलपोस्ट के नीचे अनुभवी गोलकीपर पी आर श्रीजेश की कमी स्पष्ट महसूस हुई।
घरेलू मैदान पर मिली यह हार मुख्य कोच क्रेग फुल्टन के लिए चेतावनी समान है। टीम चयन, फिटनेस, मानसिक मजबूती और डिफेंसिव संरचना पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। पेनल्टी कॉर्नर रणनीति और युवा खिलाड़ियों के संतुलित उपयोग पर भी ध्यान देना होगा।
आगे की राह आसान नहीं है। भारतीय टीम अब होबार्ट (ऑस्ट्रेलिया) दौरे पर जाएगी, जहां स्पेन और ऑस्ट्रेलिया से मुकाबले होंगे। जून में यूरोपीय चरण में नीदरलैंड, जर्मनी, इंग्लैंड और पाकिस्तान से मैच खेले जाएंगे। प्रो लीग में पहली बार भारत-पाकिस्तान मुकाबला भी देखने को मिलेगा।
चार मैचों के बाद भारत शून्य अंकों के साथ आठवें स्थान पर है, जबकि पाकिस्तान आठ मैच हारकर नौवें स्थान पर है।
ओडिशा के दृष्टिकोण से सकारात्मक पहलू यह रहा कि राज्य के दो जूनियर खिलाड़ी अमनदीप लकड़ा और रोशन कुजूर को सीनियर टीम में पदार्पण का अवसर मिला। साथ ही, हार के बावजूद दर्शकों की भारी उपस्थिति ने साबित किया कि सुंदरगढ़ जिला क्यों हॉकी का गढ़ कहलाता है।
हालांकि टिकट वितरण व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता महसूस हुई। यदि टिकट सीधे हॉकी प्रेमियों को उपलब्ध कराए जाते, तो दर्शकों की संख्या और अधिक हो सकती थी। हॉकी इंडिया और राज्य सरकार को इस दिशा में विचार करना चाहिए।
राउरकेला की यह हार भले ही निराशाजनक रही हो, लेकिन सही विश्लेषण और सुधार के साथ भारतीय टीम मजबूत वापसी कर सकती है। अब देखना होगा कि टीम इस चुनौती से कैसे उबरती है।

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