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कोटद्वार प्रकरण पर संत समाज का आक्रोश, हरिद्वार से सचिवालय देहरादून तक पदयात्रा शुरू

📰 कोटद्वार प्रकरण पर संत समाज का आक्रोश, हरिद्वार से सचिवालय तक पदयात्रा शुरू
हरिद्वार | 17 फरवरी 2026
कोटद्वार में एक संन्यासी के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार के विरोध में संत समाज में रोष देखने को मिला। मंगलवार को सर्वानंद घाट, हरिद्वार से साधु-संतों ने उत्तराखंड सचिवालय तक पदयात्रा प्रारंभ की। यह पदयात्रा साधु-संन्यासियों के सम्मान और धार्मिक गरिमा की रक्षा की मांग को लेकर निकाली गई है।
पदयात्रा का नेतृत्व
दहियाकी शिव मंदिर के महंत यति रामस्वरूपानंद गिरी के नेतृत्व में शुरू हुई इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में यति शिष्य शामिल हुए। पदयात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर न्याय की मांग करेगा।
क्या है पूरा मामला?
महंत यति रामस्वरूपानंद गिरी के अनुसार, उनके गुरु भाई यति परमात्मानंद गिरी को 5 फरवरी 2026 की रात करीब 9 बजे 10–12 पुलिसकर्मी कोटद्वार थाने ले गए। आरोप है कि पूछताछ के दौरान उनके साथ मारपीट की गई, अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया और उनके भगवा वस्त्र जबरन उतार दिए गए।
यति परमात्मानंद गिरी ने दावा किया कि उन्होंने तीन वर्ष पूर्व संन्यास लिया था और धर्मकार्य में सक्रिय हैं। उनका कहना है कि बिना स्पष्ट कारण बताए उन्हें हिरासत में लिया गया और अगले दिन जेल भेज दिया गया।
संत समाज की तीखी प्रतिक्रिया
श्रीमहंत यति रणसिंहानंद गिरी ने कहा कि यदि देवभूमि उत्तराखंड में संन्यासी के भगवा वस्त्र का अपमान होता है तो इसे पूरे सनातन धर्म का अपमान माना जाएगा।
वहीं, श्रीमहंत योगी सरोजनाथ महाराज ने आरोप लगाया कि कथित दबाव में पुलिस द्वारा साधुओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया है और सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
प्रमुख मांगें
संत समाज ने सरकार से निम्न मांगें रखीं:
दोषी पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई
साधु-संतों के सम्मान की रक्षा हेतु स्पष्ट प्रशासनिक दिशा-निर्देश
धार्मिक प्रतीकों के अपमान पर सख्त कानून
शांतिपूर्ण आंदोलन का दावा
पदयात्रा में शामिल यति शिष्यों ने कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण और संवैधानिक है, लेकिन संत समाज के सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
कौन-कौन रहे मौजूद
पदयात्रा में श्रीमहंत रणसिंहानंद गिरी, योगी सरोजनाथ महाराज, यति परमात्मानंद गिरी, सतीश शर्मा (गौरक्षा जिला प्रमुख रुड़की), योगेंद्र सालार (भारतीय हिंदू रक्षा वाहिनी), चौधरी अनुज बेनिवाल, प्रदीप धीमान, चौधरी ईसम सिंह (सेवानिवृत्त कैप्टन), स्वामी आलोक भारती सहित अन्य संत और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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