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शाहपुर पटोरी: न्याय की डगर में 'जाम' का रोड़ा, आखिर क्यों बदली गई प्रस्तावित भूमि?

शाहपुर पटोरी : किसी भी अनुमंडल के विकास के लिए 'न्याय, प्रशासन और कनेक्टिविटी' का एक ही केंद्र पर होना अनिवार्य माना जाता है। लेकिन वर्तमान में शाहपुर पटोरी नगर परिषद क्षेत्र में व्यवहार न्यायालय के स्थान चयन को लेकर जो उठापटक चल रही है, उसने आम जनमानस के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है।

विदित हो कि पूर्व में व्यवहार न्यायालय के निर्माण हेतु अनुमंडल मुख्यालय के समीप रिक्त पड़ी कृषि विभाग की भूमि का चयन किया गया था। इस स्थल का निरीक्षण स्वयं माननीय पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश महोदय द्वारा किया गया था और उनकी स्वीकृति के बाद ही इसे अंतिम रूप दिया गया था।

यह स्थान तकनीकी और व्यावहारिक रूप से इसलिए भी उत्तम है क्योंकि:
* यह अनुमंडल कार्यालय के बिल्कुल करीब है।
* पटोरी के साथ-साथ मोहिउद्दीननगर और मोहनपुर प्रखंड की लगभग 50 पंचायतों के लोग सीधे यहाँ पहुँच सकते हैं।
* सुरक्षा और प्रशासनिक समन्वय की दृष्टि से यह 'हब' के समान है।

अचानक भूमि अर्जन विभाग द्वारा जारी पत्र ने सबको चौंका दिया है, जिसमें न्यायालय को मालपुर गाँव में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है।

इस निर्णय के विरोध में कई ठोस तर्क सामने आ रहे हैं:

1. रेलवे फाटक और भीषण जाम:- मालपुर जाने के लिए पटोरी के चंदन चौक स्थित रेलवे फाटक को पार करना अनिवार्य है। रेलवे की दोहरी लाइन (Double Line) होने के कारण यह फाटक अधिकांश समय बंद रहता है। कोर्ट की कार्यवाही के लिए समय पर पहुँचना वकीलों और वादियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।
2. सुरक्षा का अभाव:-मालपुर का इलाका मुख्य मुख्यालय से कटा हुआ और एकांत में है। न्यायालय परिसर में कैदियों का आवागमन और बड़ी नकदी का लेन-देन होता है। ऐसे में एकांत क्षेत्र में आपराधिक तत्वों द्वारा किसी अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
3. आम जन पर आर्थिक बोझ:- दूरदराज की पंचायतों से आने वाले गरीब लोगों के लिए मुख्य बाजार से दूर मालपुर तक जाना अतिरिक्त समय और पैसे की बर्बादी है।

"न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि न्याय होता हुआ दिखना भी चाहिए और वह सर्वसुलभ होना चाहिए।"

इसी फरवरी माह में भूमि अर्जन विभाग ने आम जनता को अपनी राय देने के लिए बुलाया है। यह समय है कि शाहपुर पटोरी, मोहनपुर और मोहिउद्दीननगर के प्रबुद्ध नागरिक, अधिवक्ता संघ और सामाजिक कार्यकर्ता एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करें।

यदि न्यायालय का निर्माण जन-आकांक्षाओं के विपरीत और दुर्गम स्थान पर होता है, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ी प्रशासनिक भूल साबित होगी। प्रशासन को चाहिए कि वह जनहित को प्राथमिकता देते हुए पूर्व स्वीकृत स्थल (अनुमंडल मुख्यालय के समीप) पर ही न्यायालय निर्माण का निर्णय ले।

मनीष सिंह
शाहपुर पटोरी
@ManishSingh_PT

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