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बोर्ड परीक्षा की अहम बैठक में गैरहाजिर 10 शिक्षकों पर DEO सख्त!

सरसींवा (सारंगढ़-बिलाईगढ़) :- बोर्ड परीक्षा की तैयारियों के बीच जिले में अनुशासनहीनता का एक गंभीर मामला सामने आया है। जिला शिक्षा अधिकारी जे आर डहरिया ने पी.एम.श्री सेजेस बरमकेला में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में बिना सूचना अनुपस्थित रहने पर 10 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और इसे बोर्ड परीक्षाओं को लेकर प्रशासन की सख्ती के रूप में देखा जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 18 फरवरी 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा बोर्ड परीक्षा संबंधी महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। बैठक के पश्चात संस्था के स्टाफ की समीक्षा बैठक भी ली गई, लेकिन इस दौरान कई शिक्षक बिना किसी सक्षम अधिकारी को सूचित किए अनुपस्थित पाए गए। इसे कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही मानते हुए सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के अंतर्गत कदाचार की श्रेणी में रखा गया है। जिन शिक्षकों को नोटिस जारी किया गया है उनमें श्री दया सागर चौहान, श्री सचिदानंद नायक (व्याख्याता), श्री रणविजय सिंह (शिक्षक), श्रीमती मालती नायक (सहायक शिक्षक विज्ञान), श्रीमती सुनंदा सर्वणकार (शिक्षक), श्रीमती साहिना प्रवीण (सहायक शिक्षिका विज्ञान), कु. सुधा पटेल (व्याख्याता), श्रीमती ख्याती चन्द्रा (कम्प्यूटर शिक्षक), श्रीमती जया प्रधान (शिक्षक हेल्थ एंड केयर) तथा श्री हरिश चन्द्राकर (शिक्षक इलेक्ट्रिक एंड हार्डवेयर) शामिल हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी संबंधित शिक्षकों को निर्देशित किया है कि वे 20 फरवरी 2026 तक स्वयं उपस्थित होकर अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो संबंधित शिक्षकों के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी संबंधित कर्मचारियों की स्वयं की होगी।
इस मामले की जानकारी कलेक्टर सारंगढ़-बिलाईगढ़, संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर, विकासखंड शिक्षा अधिकारी बरमकेला तथा प्राचार्य पी.एम.श्री सेजेस बरमकेला को भी सूचनार्थ भेजी गई है।
बोर्ड परीक्षाओं के नजदीक आते समय इस तरह की लापरवाही को प्रशासन बेहद गंभीरता से ले रहा है। शिक्षा विभाग की यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि परीक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की ढिलाई या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिले में इस घटना को लेकर शिक्षा जगत में चर्चा का माहौल है और इसे भविष्य में अनुशासन कायम रखने की कड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

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