logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

शिक्षा का 'आरक्षित' कत्ल: क्या 40% वाले गुरुजी संवारेंगे भविष्य? सरकारी स्कूलों की बदहाली पर 'सर्टिफाइड' मुहर!

— डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल
भोपाल/डेस्क। भारत की शिक्षा व्यवस्था अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ योग्यता (Merit) को हाशिए पर धकेल कर केवल 'सियासी तुष्टिकरण' को सर्वोपरि मान लिया गया है। हाल ही में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के क्वालीफाइंग मार्क्स को लेकर जो आंकड़े सामने आए हैं, उसने देश के जागरूक नागरिकों और सामान्य वर्ग के युवाओं को झकझोर कर रख दिया है।

नौकरी में भी 'योग्यता' से समझौता क्यों?
दस्तावेजों के मुताबिक, शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) में जहाँ सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को 60% (90 अंक) लाना अनिवार्य है, वहीं आरक्षित वर्ग के लिए यह सीमा घटाकर 40% (60 अंक) कर दी गई है।

बड़ा सवाल: जब ये लोग पहले से सरकारी नौकरी में हैं, अच्छी तनख्वाह पा रहे हैं और सिस्टम का हिस्सा हैं, तो एक 'डिपार्टमेंटल टेस्ट' या पात्रता परीक्षा में भी आरक्षण की बैसाखी क्यों? क्या बच्चों को पढ़ाने के लिए आवश्यक ज्ञान की मात्रा जाति के आधार पर कम या ज्यादा हो सकती है?

सरकारी स्कूलों की दुर्दशा का 'असली' कारण?
आम जनता आज अपने बच्चों को सरकारी स्कूल भेजने से कतराती है। इसका सबसे बड़ा कारण 'योग्यता का अभाव' माना जा रहा है।

विडंबना: जो शिक्षक खुद 40% अंक पाकर 'पात्र' घोषित किए जा रहे हैं, उनसे 100% परिणाम की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

कड़वा सच: हैरानी की बात यह है कि आरक्षण के लाभ से शिक्षक बने लोग भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ाते। वे जानते हैं कि प्राइवेट स्कूलों में 'मेरिट' चलती है, और वे अपने बच्चों का भविष्य उन शिक्षकों के हाथ में नहीं छोड़ना चाहते जो खुद बैसाखियों के सहारे सिस्टम में आए हैं।

सामाजिक समरसता बनाम सरकारी आंकड़े
एक तरफ सरकार सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहती है कि प्रदेश का 38.39% सामान्य वर्ग पिछड़ों के साथ पानी नहीं पीता, वहीं दूसरी तरफ नियमों के जरिए उसी सामान्य वर्ग के प्रति 'भेदभाव' को सरकारी संरक्षण दिया जा रहा है।

"यह केवल आरक्षण नहीं, बल्कि देश की अगली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अगर गुरु ही कम अंकों पर भर्ती होंगे, तो शिष्यों का स्तर क्या होगा, यह समझना मुश्किल नहीं है।"

0
421 views

Comment