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इतिहास का नया 'इंग्लिश अवतार': क्या भगवान बुद्ध भी कॉन्वेंट स्कूल में पढ़े थे?

— डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल
नई दिल्ली | विशेष संवाददाता
देश की राजनीति में 'जुमलेबाजी' और 'फेंकूगिरी' के किस्से तो पुराने हैं, लेकिन हाल ही में जो नया 'इतिहास' रचा गया है, उसने तो गिरगिट को भी कॉम्प्लेक्स दे दिया है। हमारे 'विश्वगुरु' प्रधान सेवक ने वैश्विक मंच पर भगवान बुद्ध को जिस अंदाज में पेश किया, उसने न केवल इतिहासकारों के होश उड़ा दिए हैं, बल्कि आम जनता को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम अब एक 'मल्टीवर्स' की कहानी जी रहे हैं?
राम-कृष्ण की धरती रातों-रात हुई बुद्ध की?
कल तक जो सत्ताधारी मंचों से दहाड़-दहाड़ कर भारत को 'मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम' और 'योगेश्वर श्री कृष्ण' की पावन धरा बताते थे, उन्होंने अपनी सहूलियत और विदेशी तालियों के लिए रातों-रात इसे सिर्फ बुद्ध की धरती घोषित कर दिया। सवाल यह उठता है कि क्या वोट बैंक और अंतरराष्ट्रीय इमेज के हिसाब से हमारे आराध्य और देश की पहचान भी बदल दी जाएगी? गिरगिट भी इतनी तेजी से रंग नहीं बदलता, जितनी तेजी से हमारे श्रीमान अपनी विचारधारा का चोला बदलते हैं।
पाली नहीं, बुद्ध ने दी 'फर्राटेदार अंग्रेजी'!
हैरानी की पराकाष्ठा तो तब हो गई जब प्रधान मंत्री ने दावा किया कि भगवान बुद्ध ने "Right Action comes from Right Understanding" जैसे भारी-भरकम अंग्रेजी मुहावरों में उपदेश दिए थे। अब पूरा देश यह जानना चाहता है कि:
1. ढाई हजार साल पहले भगवान बुद्ध आखिर कौन से 'कॉन्वेंट स्कूल' में दाखिला लिए थे?
2. क्या उस जमाने में भी 'डिजिटल इंडिया' का वाई-फाई था जिससे बुद्ध सीधे ऑक्सफोर्ड की डिक्शनरी डाउनलोड कर रहे थे?
3. क्या पाली और प्राकृत भाषाएं अब सरकारी फाइलों की तरह रद्दी में फेंक दी गई हैं?
देश की इज्जत की 'ग्लोबल नीलामी'
तथ्यों के साथ ऐसी शर्मनाक छेड़छाड़ सिर्फ अपनी 'महानता' सिद्ध करने के लिए की जा रही है। जब देश का मुखिया ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ऐतिहासिक ब्लंडर (बड़ी गलतियां) करे, तो पूरी दुनिया में देश की छवि का क्या होता होगा? इतिहास को अपनी जागीर समझना और महापुरुषों के मुख में अपनी मनगढ़ंत भाषा ठूंसना सिर्फ एक 'कुशल जुमलेबाज' के बस की बात है।
जनता पूछ रही है कि क्या अब इतिहास की नई किताबों में बुद्ध को 'अंग्रेजी का प्रोफेसर' बताया जाएगा? या फिर यह सिर्फ एक और चुनावी 'फेकूगिरी' का हिस्सा है जिसका हकीकत से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है।

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