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5 पीढ़ियों का ठिकाना, फिर भी पहचान को मोहताज: तिलहर के 45 परिवारों पर भारी पड़ा एक नोटिस तिलहर / शाहजहांपुर। विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर)

5 पीढ़ियों का ठिकाना, फिर भी पहचान को मोहताज: तिलहर के 45 परिवारों पर भारी पड़ा एक नोटिस
तिलहर / शाहजहांपुर। विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के तहत तिलहर कस्बे के बहादुरगंज मोहल्ले सहित विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले 45 सिख परिवार इन दिनों गंभीर प्रशासनिक संकट से गुजर रहे हैं। पीढ़ियों से एक ही स्थान पर निवास करने के बावजूद लगभग 100 लोगों के नाम मतदाता सूची से बाहर हो जाने के बाद उन्हें अपनी पहचान और नागरिक अधिकार साबित करने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि निर्वाचन आयोग द्वारा नोटिस के जवाब में मांगे गए 13 वैकल्पिक दस्तावेजों में से अधिकांश परिवारों के पास कोई भी उपलब्ध नहीं है। जाति प्रमाण पत्र या जन्म प्रमाण पत्र उनके लिए समाधान बन सकता है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर प्रमाण पत्र जारी न होने से स्थिति और जटिल हो गई है।
पीढ़ियों से यहीं बसे, फिर भी प्रमाण नहीं
बहादुरगंज निवासी 80 वर्षीय मोती सिंह बताते हैं कि उनके दादा-परदादा भी यहीं रहते थे और परिवार आज भी छोटे-मोटे व्यवसाय जैसे फेरी लगाकर चूरन, चश्मा व अन्य सामान बेचकर जीविका चलाता है। परिवार में किसी ने सरकारी नौकरी या उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं की, इसलिए कभी जाति प्रमाण पत्र बनवाने की आवश्यकता महसूस नहीं हुई।
वे बताते हैं कि अब तक परिवार के सभी सदस्य नियमित रूप से हर चुनाव में मतदान करते आए हैं, लेकिन इस बार अचानक सूची से नाम हटने के बाद वे असहाय महसूस कर रहे हैं।
लगभग 450 परिवारों का समाज, पर 45 पर संकट
स्थानीय लोगों के अनुसार तिलहर नगर में सिख समुदाय के लगभग 450 परिवार रहते हैं। जिनके नाम पहले से मतदाता सूची में सुरक्षित हैं उन्हें कोई परेशानी नहीं है, लेकिन जिनके नाम छूट गए या संशोधन की आवश्यकता है, वे गंभीर संकट में फंस गए हैं।
नीरज सिंह कहते हैं,
“हम अपने परिवार की पांचवीं पीढ़ी हैं जो यहां रह रही है। कभी जाति प्रमाण पत्र की जरूरत ही नहीं पड़ी, इसलिए बनवाया भी नहीं।”
महिलाओं ने भी जताई चिंता
सोनी देवी के अनुसार मोहल्ले के 45 लोगों को एसआईआर का नोटिस मिला है, लेकिन कोई भी अधिकारी जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए स्पष्ट मार्ग नहीं बता रहा।
रोशनी बताती हैं कि अधिकारी कार्यालयों के चक्कर लगाते-लगाते लोग थक चुके हैं, फिर भी कोई समाधान नहीं निकल रहा।
बलजीत कौर ने कहा,
“हम मजहबी सिख हैं, फिर भी हमारा जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा। अधिकारी बताएं कि नोटिस का जवाब कैसे दें।”
जनप्रतिनिधियों से भी नहीं मिली ठोस मदद
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों से संपर्क करने पर केवल आश्वासन मिला, लेकिन व्यावहारिक समाधान नहीं हुआ। इससे लोगों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि मतदाता सूची से बाहर होना उनके मतदान अधिकार पर सीधा प्रभाव डालता है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार तहसीलदार और नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित परिवारों के लिए जाति प्रमाण पत्र जारी करने की संभावनाओं की जांच की जाए। यदि यह संभव न हो तो जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया शुरू कराई जाए, ताकि नोटिस का विधिवत जवाब दिया जा सके।
पहचान और अधिकार की लड़ाई
यह मामला केवल दस्तावेजों का नहीं, बल्कि नागरिक पहचान और लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रश्न बन गया है। दशकों से एक ही स्थान पर रह रहे परिवार अचानक खुद को “प्रमाणित नागरिक” साबित करने की स्थिति में पाकर मानसिक और सामाजिक दबाव झेल रहे हैं।
स्थानीय लोग प्रशासन से शीघ्र समाधान की मांग कर रहे हैं, ताकि उनकी पहचान बहाल हो और वे आगामी चुनावों में अपने मतदान अधिकार का प्रयोग कर सकें

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