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राजद विधायक आलोक कुमार मेहता जी के ब्राह्मणवाद पर दिए वक्तव्य की चौतरफा हो रही आलोचना

आज विधानसभा की कार्यवाही अचानक सुनने को मिली। संदर्भ क्या था, यह स्पष्ट नहीं था, लेकिन “ब्राह्मणवाद” शब्द सुनकर मन व्यथित हुआ। लोकतंत्र में बहस होनी चाहिए, विचारों का मतभेद भी होना चाहिए, पर किसी समाज विशेष को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है।
विधानसभा में श्री Alok Kumar Mehta का वक्तव्य चर्चा में रहा, और उसके जवाब में भाजपा विधायक श्री मान Mithilesh Tiwari Baikunthpur ने भगवान कृष्ण और सुदामा की कथा का उल्लेख किया। यह कथा केवल धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा है — जहां मित्रता, विनम्रता और सम्मान जाति से ऊपर है। श्रीकृष्ण द्वारा सुदामा के चरण धोना इस बात का प्रतीक है कि सच्ची महानता सेवा और संस्कार में है।
ब्राह्मण समाज की पहचान केवल जाति से नहीं, बल्कि उसके योगदान और मूल्यों से है। ब्राह्मण समाज का स्थान भारतीय संस्कृति में सदैव ज्ञान, तप, त्याग और मार्गदर्शन के कारण अत्यंत सम्मानित रहा है। यह वह समाज है जो जन्म से नहीं, बल्कि अपने कर्म, संस्कार और आचरण से पहचाना जाता है।
ब्राह्मण विवाह में मंगलाचरण भी कराता है और श्राद्ध में पितरों का तर्पण भी — अर्थात जीवन के प्रारंभ से अंत तक हर संस्कार में उसकी भूमिका जुड़ी रहती है। वह समाज को केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि धर्म, कर्तव्य और मर्यादा का बोध कराता है।
इतिहास साक्षी है कि ब्राह्मण समाज ने ज्ञान और संस्कार की परंपरा को जीवित रखा है। उसका सम्मान किसी अन्य समाज के अपमान से नहीं, बल्कि उसके अपने आदर्शों और योगदान से स्थापित होता है।
किसी भी समाज के बारे में कटु भाषा का प्रयोग सामाजिक सौहार्द को कमजोर करता है। हमें यह समझना होगा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता और परस्पर सम्मान में है।
श्रेष्ठता का अर्थ दूसरों को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि अपने आचरण से उच्च आदर्श स्थापित करना है। ब्राह्मण समाज ने इतिहास में ज्ञान, संस्कार और सेवा के माध्यम से जो भूमिका निभाई है, वह सम्मान के योग्य है — और हर समाज का सम्मान सुरक्षित रहना चाहिए।
समरसता ही भारत की असली ताकत है।
अखिलेश कुमार मिश्रा जिला उपाध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी समस्तीपुर दक्षिणी किसान मोर्चा

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