logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

मोबाइल चार्जिंग के दौरान बैटरी फटने से बालक की दर्दनाक मौत

जटहां बाजार थाना क्षेत्र के कंठीछपरा गांव में एक बेहद दुखद हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। मोबाइल की बैटरी में हुए अचानक विस्फोट से घायल तीन वर्षीय बच्ची की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना ने न सिर्फ परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि मोबाइल और बैटरी से जुड़े सुरक्षा मानकों को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के अनुसार हादसा उस समय हुआ जब मोबाइल की बैटरी को अलग करके सोलर पैनल से सीधे चार्ज करने की कोशिश की जा रही थी।


बताया जा रहा है कि कंठीछपरा गांव निवासी सिंहासन प्रसाद मजदूरी के लिए परदेश में रहते हैं और वर्तमान में गुजरात में कार्यरत हैं। घर पर उनकी पत्नी मूरती देवी अपनी छोटी बेटी सृष्टि के साथ थीं। सोमवार की सुबह लगभग 11 बजे उन्होंने अपने मोबाइल फोन की बैटरी निकालकर घर में लगे सोलर पैनल से तारों के सहारे सीधे चार्ज करने का प्रयास किया। यह तरीका पूरी तरह असुरक्षित था, लेकिन ग्रामीण इलाकों में बिजली की समस्या और संसाधनों की कमी के कारण कई लोग ऐसे जुगाड़ का इस्तेमाल करते देखे जाते हैं।


घटना के समय मूरती देवी अपनी तीन वर्षीय बेटी के साथ टिनशेड के नीचे बैठी थीं। बैटरी को चार्जिंग से जोड़ने के कुछ ही देर बाद अचानक तेज आवाज के साथ विस्फोट हुआ। बैटरी उछलकर सीधे बच्ची के सिर पर जा गिरी, जिससे उसे गंभीर चोट लग गई। विस्फोट इतना तेज था कि आसपास मौजूद लोग घबराकर मौके पर दौड़े। बच्ची की हालत गंभीर देखकर परिवार और ग्रामीण तुरंत उसे जिला अस्पताल रविंद्र नगर धूस ले गए।


जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। वहां डॉक्टरों की टीम ने इलाज शुरू किया, लेकिन चोट अधिक गंभीर होने के कारण कुछ समय बाद बच्ची ने दम तोड़ दिया। मासूम की मौत की खबर मिलते ही गांव में मातम छा गया। परिवार के लोगों का रो-रो कर बुरा हाल है, जबकि पिता के परदेश में होने से दुख और भी गहरा हो गया है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी जानकारी के अभाव में लोग कई बार मोबाइल या बैटरी को सीधे तार से जोड़कर चार्ज करने जैसी खतरनाक कोशिशें कर बैठते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल बैटरी को उसके निर्धारित चार्जर और सुरक्षा सर्किट के बिना चार्ज करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। बैटरी के भीतर रासायनिक प्रतिक्रिया असंतुलित होने पर वह गर्म होकर फट सकती है, जिससे जानलेवा हादसे होने की आशंका रहती है।


गांव के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि लोग सुरक्षित तरीके से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर सकें। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि बिजली और चार्जिंग की समुचित व्यवस्था न होने के कारण ग्रामीण मजबूरी में जोखिम उठाते हैं। यदि गांवों में बेहतर बिजली आपूर्ति और सुरक्षित चार्जिंग सुविधाएं उपलब्ध हों, तो इस प्रकार की घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।


इस दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि छोटी सी लापरवाही कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है। मासूम सृष्टि की मौत सिर्फ एक परिवार का नुकसान नहीं, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल या किसी भी बैटरी को कभी भी खोलकर सीधे चार्ज करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए और खराब बैटरी को तुरंत बदल देना चाहिए।


फिलहाल पुलिस और स्थानीय प्रशासन मामले की जानकारी जुटा रहे हैं। गांव में शोक का माहौल है और हर कोई इसी बात को दोहरा रहा है कि अगर थोड़ी तकनीकी जानकारी या सावधानी होती, तो शायद एक मासूम की जान बचाई जा सकती थी। यह हादसा सभी के लिए एक सीख बनकर सामने आया है कि तकनीक का उपयोग हमेशा सुरक्षित तरीके से ही किया जाना चाहिए।

1
0 views

Comment