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मुख्यमंत्री परिभ्रमण यात्रा: बोधगया, राजगीर और नालंदा की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक ज्ञानयात्रा

मुख्यमंत्री परिभ्रमण यात्रा: बोधगया, राजगीर और नालंदा की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक ज्ञानयात्रा

नन्द कुमार सिंह /ब्यूरो चीफ, राष्ट्रीय प्रसार

मदनपुर /औरंगाबाद--रविवार 22 फरवरी को प्रातः 5:30 बजे राजकीय मध्य विद्यालय पतेया से प्रधानाचार्य संजय पाल एवं समस्त शिक्षकों के नेतृत्व में बच्चों की टोली मुख्यमंत्री परिभ्रमण यात्रा के लिए उत्साहपूर्वक रवाना हुई। सुबह का शांत वातावरण, बच्चों के चेहरों पर उत्सुकता और शिक्षकों का मार्गदर्शन इस शैक्षणिक यात्रा को विशेष बना रहा था।
इस परिभ्रमण यात्रा के अंतर्गत छात्रों को ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के विश्वविख्यात स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा, जिससे उन्हें अपने प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को निकट से जानने का अवसर प्राप्त होगा।
सबसे पहले बच्चों को बोधगया ले जाया जाएगा, जो भगवान गौतम बुद्ध की तपोभूमि एवं ज्ञानस्थली के रूप में विश्व प्रसिद्ध है। यहीं स्थित महाबोधि मंदिर वह पवित्र स्थल है जहाँ बुद्ध को बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। यह स्थान शांति, करुणा और अहिंसा का संदेश देता है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक आत्मिक शांति का अनुभव करते हैं। बच्चों को बताया जाएगा कि किस प्रकार बुद्ध के उपदेश आज भी विश्व को शांति और मानवता का मार्ग दिखा रहे हैं।
इसके पश्चात छात्र राजगीर का भ्रमण करेंगे। राजगीर प्राचीन मगध की राजधानी रहा है और यह स्थान ऐतिहासिक, धार्मिक एवं प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ की पहाड़ियाँ, गर्म जलकुंड तथा विश्व शांति स्तूप विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। विश्व शांति स्तूप से सम्पूर्ण राजगीर का मनोहारी दृश्य दिखाई देता है, जो बच्चों के लिए अविस्मरणीय अनुभव होगा।
यात्रा के अगले चरण में छात्र नालंदा जाएंगे, जहाँ प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष स्थित हैं। यह विश्वविद्यालय विश्व का प्राचीनतम शिक्षा केंद्र माना जाता है, जहाँ देश-विदेश से विद्यार्थी अध्ययन हेतु आते थे। यहाँ बच्चों को प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था, अनुशासन और ज्ञान परंपरा के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
इस संपूर्ण शैक्षणिक एवं आध्यात्मिक यात्रा के पश्चात सभी छात्र पुनः अपने विद्यालय राजकीय मध्य विद्यालय पतेया में सकुशल पहुंचाए जाएंगे।
यह परिभ्रमण यात्रा न केवल छात्रों के ज्ञानवर्धन का माध्यम बनेगी, बल्कि उनमें अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति गर्व और सम्मान की भावना भी जागृत करेगी।

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