logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

धर्म, राजनीति और इंसानियत


आज भारत जिस सामाजिक विषाक्तता से गुजर रहा है,
उसका मूल कारण धर्म और राजनीति का घातक मिश्रण है।
कुछ राजनेताओं द्वारा “हिंदू राष्ट्र” जैसे नारों के माध्यम से
देश को धार्मिक आधार पर बाँटने का प्रयास
हमारी साझा संस्कृति और संविधान—दोनों के विरुद्ध है।
धर्म का उद्देश्य मनुष्य को नैतिक, करुणामय और संवेदनशील बनाना है।
जबकि राजनीति का उद्देश्य जनकल्याण होना चाहिए।
लेकिन जब राजनीति सत्ता की भूख में धर्म का उपयोग करती है,
तो वह समाज में नफ़रत, भय और अविश्वास फैलाती है।
भारत की आत्मा विविधता में एकता है।
यह देश किसी एक धर्म का नहीं,
बल्कि इंसानियत, सह-अस्तित्व और भाईचारे का प्रतीक रहा है।
हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि
संविधान हमें पहले भारतीय नागरिक बनाता है—
न कि किसी धर्म विशेष का अनुयायी।
आज आवश्यकता इस बात की है कि
हम खुद से यह प्रश्न पूछें—
क्या हम इंसान पहले हैं या किसी पहचान का लेबल?
जब तक इंसानियत ज़िंदा है,
तब तक देश और धर्म दोनों सुरक्षित हैं।
लेकिन अगर इंसानियत मर गई,
तो कोई भी राष्ट्र या आस्था हमें नहीं बचा सकती।
आइए, हम शपथ लें—
कि हम नफ़रत नहीं, मानवता चुनेंगे।
विभाजन नहीं, एकता चुनेंगे।
और राजनीति को
मानव मूल्यों से ऊपर नहीं जाने देंगे।
पहले इंसान बनें,
फिर भारतीय—
यही सच्चा राष्ट्रधर्म है।
जय भारत
जय भारती
जय इंसानियत
जय हिंद

3
4 views

Comment