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भोगनीपुर गंग नहर सिल्ट उठान बना विवाद का केंद्र: राजस्व बढ़ा या नियम टूटे?*

*भोगनीपुर गंग नहर सिल्ट उठान बना विवाद का केंद्र: राजस्व बढ़ा या नियम टूटे?*

*ब्रेकिंग:-*

⏩ भोगनीपुर गंग नहर किनारे चल रहे सिल्ट उठान कार्य को लेकर नया तर्क सामने आ रहा है। प्रशासन इसे राजस्व और सफाई व्यवस्था से जुड़ा नियमित ठेका कार्य बता रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात कुछ और कहानी कह रहे हैं। सवाल यह है कि क्या राजस्व के नाम पर तकनीकी मानकों से समझौता किया जा रहा है?,,,,,,,,


⏩ बेहड़ापुल क्षेत्र में सिल्ट उठाने का काम तेज़ी से चल रहा है। किसानों का आरोप है कि सिर्फ सतही सिल्ट हटाने के बजाय नहर की पटरी तक खोदाई की जा रही है। यदि यह सही है तो यह केवल निर्माण मानकों का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि भविष्य में नहर की मजबूती के लिए खतरे की घंटी भी हो सकता है।,,,,,,,,,,

⏩ दूसरा बड़ा सवाल पारदर्शिता को लेकर उठ रहा है। जब विभागीय अधिकारियों से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने मौखिक जवाब देने से इनकार करते हुए “लिखित में जवाब” देने की बात कही। इससे स्थानीय लोगों के मन में संदेह गहराया है कि कहीं कुछ छिपाया तो नहीं जा रहा।,,,,,,,

⏩ सूत्रों में यह चर्चा भी है कि ठेका प्रक्रिया और कार्य संचालन में प्रभावशाली संबंधों की भूमिका हो सकती है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन क्षेत्र में इस मुद्दे पर चर्चाएं तेज हैं।,,,,,,,,

⏩ किसानों का तर्क साफ है—अगर सिल्ट हटाना जरूरी है तो तकनीकी मानकों के तहत हो, ताकि नहर की संरचना सुरक्षित रहे और सिंचाई व्यवस्था प्रभावित न हो। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कहीं भी अनियमितता मिले तो सख्त कार्रवाई की जाए।
अब पूरा मामला इस बात पर टिका है कि क्या विभाग पारदर्शिता के साथ तथ्य सार्वजनिक करेगा या सवाल यूं ही हवा में तैरते रहेंगे।,,,,,,,,


रिपोर्टर -नवनीत कुमार सिंह

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