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"बकाया वेतन भुगतान नहीं कर 19 बर्षो से महिला शिक्षक का उत्पीड़न "

19 वर्षों से वेतन से वंचित शिक्षिका शांति कुमारी को कब मिलेगा न्याय?
वैध नियुक्ति के बावजूद शिक्षा विभाग की उदासीनता पर उठे गंभीर सवाल
जिला शिक्षा पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट में भी नियुक्ति सही, फिर क्यों रोका गया वेतन?
बिहार में सुशासन के दावों के बीच एक बेहद चौंकाने वाला और अमानवीय मामला सामने आया है, जहाँ एक महिला शिक्षिका शांति कुमारी को पिछले 19 वर्षों से एक रुपये का भी वेतन नहीं दिया गया है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि शिक्षिका की नियुक्ति को जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ), गया द्वारा जांच के बाद वैध घोषित किया जा चुका है, इसके बावजूद आज तक उनका वेतन भुगतान नहीं कराया गया।
भूख, बीमारी और कर्ज में गुजर रहा जीवन
वेतन नहीं मिलने के कारण शिक्षिका शांति कुमारी का जीवन पूरी तरह संकट में है। इलाज, भोजन, बच्चों की पढ़ाई और कर्ज का बोझ से परेशान है।
यह मामला सिर्फ वेतन का नहीं, बल्कि मानवाधिकार उल्लंघन और सामाजिक अन्याय का गंभीर उदाहरण बन चुका है।
बार-बार आवेदन, फिर भी फाइलें धूल फांक रही
शिक्षिका द्वारा जिला शिक्षा कार्यालय, डीपीओ स्थापना, डीएम कार्यालय, शिक्षा विभाग और कई उच्च अधिकारियों को दर्जनों बार आवेदन दिए गए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला।
सूत्रों के अनुसार, वेतन भुगतान के लिए रिश्वत मांगे जाने के भी आरोप सामने आ रहे हैं, जो पूरे शिक्षा तंत्र पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हैं।
पत्रकार विजय कुमार ने उठाई आवाज
गया के पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता विजय कुमार पिछले कई वर्षों से इस मामले को उजागर कर रहे हैं। उन्होंने कहा
"जब सरकार की अपनी जांच रिपोर्ट नियुक्ति को सही मानती है, तो फिर वेतन रोकना किस कानून के तहत है? यह सीधे-सीधे महिला शिक्षक का मानसिक, सामाजिक और आर्थिक उत्पीड़न है।"
आयोग, लोकायुक्त और मानवाधिकार आयोग में शिकायत
मामले को लेकर राज्य मानवाधिकार आयोग, लोकायुक्त, और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को शिकायतें भेजी जा चुकी हैं।
बड़ा सवाल
क्या सुशासन की सरकार में एक महिला शिक्षिका को 19 साल तक भूखा रखा जा सकता है?
क्या दोषी अधिकारियों पर कभी कार्रवाई होगी?
शांति कुमारी को उनका बकाया वेतन और सम्मान कब मिलेगा?
न्याय की मांग
शिक्षिका शांति कुमारी को तत्काल
पूरा बकाया वेतन
ब्याज सहित भुगतान
दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई
की मांग जोर पकड़ रही है।

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