सबलगढ़ किले पर अतिक्रमण: सरकार की अनदेखी या प्रशासनिक सहमति?
संवाददाता: योगेंद्र सिंह जादौन (फौजी)
सबलगढ़।
मुरैना जिले के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल सबलगढ़ किले के भीतर और उसके आसपास वर्षों से अवैध अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है, लेकिन प्रशासन की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत कमजोर नजर आ रही है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि अतिक्रमणकारियों को खुलेआम किले के भीतर छोटे-बड़े ढांचे बनाने की अनुमति दी जा रही है, जिससे इस प्राचीन स्मारक की सुरक्षा और संरक्षण पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय सामाजिक संगठनों का कहना है कि किले के भीतर बनी मज़ार-मस्जिद और अन्य संरचनाएँ ऐतिहासिक धरोहर के प्रबंधन और संरक्षण के नियमों का उल्लंघन करती हैं, लेकिन अभियान या प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। इन समूहों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्दी कार्रवाई नहीं हुई, तो भारी विरोध प्रदर्शन और आंदोलन होगा।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि पुराने समय से जारी अतिक्रमण की वजह से किले की पुरातात्विक स्थिति प्रभावित हो रही है तथा आने वाले समय में इसे संरक्षित करने की जिम्मेदारी निभाने वाली सरकारी एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि प्रशासन की तरफ से अभी तक किसी आधिकारिक बुलडोजर कार्रवाई या प्रतिबंधात्मक कदम को लेकर कोई आधिकारिक सूचना उपलब्ध नहीं हुई है, और न ही किले की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट रणनीति घोषित की गई है। पुरातन धरोहर और पर्यटन संरक्षण की दृष्टि से यह मामला स्थानीय लोगों के साथ-साथ इतिहासकारों और संस्कृति प्रेमियों के लिए भी चिंता का विषय बन चुका है।