मदीना मस्जिद में कुरान मुकम्मल, मौलाना ने दी नसीहत: 'कुरान पढ़ना सुन्नत है, तो उसे खामोशी से सुनना वाजिब।
सम्भल। सैफ खान सराय स्थित मदीना मस्जिद में रमजान-उल-मुबारक के मुकद्दस महीने के दौरान तरावीह की नमाज में कुरान-ए-पाक मुकम्मल होने पर एक नूरानी मजलिस और विशेष दुआओं का पुरखुलूस आयोजन किया गया। इस मुबारक मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय अकीदतमंदों ने शिरकत की और अल्लाह की बारगाह में मुल्क व कौम की खुशहाली के लिए गिड़गिड़ाकर दुआएं मांगीं। कार्यक्रम के दौरान मदीना मस्जिद के इमाम हाफिज गय्यूर सहाब ने नमाजियों को संबोधित करते हुए कुरान की तालीम और उसके अदब पर खास जोर दिया। उन्होंने हालिया दिनों में तरावीह के दौरान होने वाली बातचीत और शोर-शराबे पर फिक्र जाहिर करते हुए नसीहत की कि कुरान पढ़ना सुन्नत है, लेकिन जब कुरान पढ़ा जा रहा हो तो उसे पूरी खामोशी और तवज्जो के साथ सुनना वाजिब है। उन्होंने साफ तौर पर समझाया कि वाजिब का दर्जा सुन्नत से भारी होता है, इसलिए तिलावत के दौरान खामोश रहकर उसका हक अदा करना हर मोमिन का फर्ज है ताकि इबादत की रूहानियत बरकरार रहे।
इस रूहानी महफिल में हाफिज गय्यूर सहाब ने 20 दिन में मुकम्मल कुरान सुनाया, जिसके बाद मौजूद तमाम लोगों ने उनकी शानदार तिलावत के लिए उन्हें मुबारकबाद पेश की और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए दुआ की। इस खास मौके पर हाजी इरशाद हुसैन, मोहम्मद शागिल, मोहम्मद दानिश, उवैश, आकिब, सुहेल मलिक, तासीर, आमिर, शायक रजा और हाफिज मेराजुल समेत क्षेत्र के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। अकीदतमंदों की हौसला-अफजाई के लिए मस्जिद में शरबत और मिठाई का भी विशेष इंतजाम किया गया। पूरे क्षेत्र में इस वक्त मजहबी माहौल बना हुआ है और लोग बड़े ही एहतराम के साथ इबादत में मशगूल हैं।