देश के नाम खुला पत्र
विषय: स्वच्छ राजनीति और जवाबदेह नेतृत्व के लिए राष्ट्रीय जागरण का आह्वान।
प्रिय देशवासियों,
भारत केवल एक देश नहीं है, यह करोड़ों लोगों की आशा, विश्वास और भविष्य का प्रतीक है। हमारे संविधान ने हमें लोकतंत्र, न्याय, समानता और नैतिक शासन का सपना दिया था। लेकिन आज समय आ गया है कि हम स्वयं से एक ईमानदार प्रश्न पूछें—क्या हमारी राजनीति वास्तव में उन आदर्शों पर चल रही है?
हमारे देश में यदि कोई व्यक्ति एक साधारण सरकारी नौकरी प्राप्त करना चाहता है, तो उसे लिखित परीक्षा, साक्षात्कार, पुलिस सत्यापन, मेडिकल जांच और चरित्र प्रमाण जैसी कई कठोर प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। तब जाकर उसे देश की सेवा करने का अवसर मिलता है।
लेकिन जो लोग देश की संसद और विधानसभाओं में बैठकर कानून बनाते हैं और राष्ट्र की दिशा तय करते हैं, उनके लिए ऐसी कोई अनिवार्य व्यवस्था क्यों नहीं है?
आज कई बार यह देखने को मिलता है कि राजनीति में ऐसे लोग भी प्रवेश कर जाते हैं जिनकी शिक्षा पर प्रश्नचिह्न होते हैं, जिनकी सोच समाज को जोड़ने के बजाय विभाजित करती है, और जिन पर गंभीर आपराधिक आरोप भी लगे होते हैं। कुछ मामलों में तो बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के आरोपों के बावजूद भी व्यक्ति सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहते हैं। यह स्थिति किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अत्यंत चिंताजनक है।
ऐसी स्थिति को देखकर वर्षों पहले आई फिल्म गोपी का प्रसिद्ध गीत “रामचंद्र कह गए सिया से” याद आ जाता है—
हे रामचंद्र कह गए सिया से, ऐसा कलयुग आएगा,
हंस चुगेगा दाना तिनका, कौआ मोती खाएगा।
यह पंक्तियाँ आज के समाज के लिए एक गहरी चेतावनी हैं। जब योग्य और ईमानदार लोग पीछे रह जाते हैं और अयोग्य तथा अनैतिक लोग सत्ता में बैठ जाते हैं, तब समाज का संतुलन बिगड़ जाता है।
प्रिय देशवासियों,
अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर स्वच्छ और नैतिक राजनीति की मांग करें। राजनीति में प्रवेश के लिए भी स्पष्ट और कठोर मानक निर्धारित किए जाने चाहिए—जैसे न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता, चरित्र और सामाजिक आचरण की जांच, आपराधिक मामलों की सख्त जांच और जनसेवा के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता।
यदि किसी सरकारी कर्मचारी पर गंभीर अपराध सिद्ध हो जाए तो उसकी नौकरी समाप्त हो सकती है, उसकी पेंशन और सुविधाएँ समाप्त हो सकती हैं। तो फिर जनता के प्रतिनिधियों के लिए ऐसी कठोर जवाबदेही क्यों नहीं होनी चाहिए?
इसलिए मैं देश के सभी जागरूक नागरिकों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों से विनम्र अपील करता हूँ कि वे शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से एकजुट होकर स्वच्छ राजनीति की मांग करें। देश के सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों में जनहित याचिकाएँ, अपीलें और मेमोरेंडम देकर यह मांग उठाई जा सकती है कि राजनीति को अपराध और अनैतिकता से मुक्त किया जाए।
आज राजनीति में कुछ युवा नेता ऐसे भी हैं जो व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता की बात उठाते हैं। उनमें से एक नाम राघव चड्ढा का भी है, जो समय-समय पर संसद में जवाबदेही और सुधार के मुद्दे उठाते रहे हैं। ऐसे प्रयासों को देश के जागरूक नागरिकों का समर्थन मिलना चाहिए।
मेरे प्यारे देशवासियों,
लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति जनता होती है। जब जनता जागती है तो इतिहास बदल जाता है। यदि हम चुप रहते हैं, तो गलत लोग सत्ता में बने रहते हैं। लेकिन यदि हम जागरूक होकर सही नेतृत्व का समर्थन करते हैं, तो देश की दिशा बदल सकती है।
आइए हम सब मिलकर एक राष्ट्रीय संकल्प लें—
हम अपराध, भ्रष्टाचार, अनैतिकता और गंदी राजनीति का समर्थन नहीं करेंगे।
हम ऐसे नेताओं को आगे लाएंगे जो देश के विकास, शिक्षा, न्याय और मानवता की बात करें।
याद रखिए—
देश का भविष्य संसद में नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों के मन और निर्णय में तय होता है।
जागो भारत,
स्वच्छ राजनीति का समय आ गया है।
सादर,
डॉ. मोहिंदर सिंह बाली
देश चिंतक