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रिफाइनरी में रोजगार और पुनर्वास की मांग को लेकर सांसद चंदशेखर आजाद को लिखा पत्र




पानीपत, 17 मार्च ( निर्मल सिंह ) : गांव बोहली निवासी सामाजिक कार्यकर्ता पवन रंगा ने माननीय सांसद श्री चंद्रशेखर आजाद लोकसभा क्षेत्र , नगीना को पत्र भेजकर ग्रामीण बच्चों के रोजगार व समुचित तरीके से पुनर्वास देने की मांग की है।


गांव बोहली निवासी पवन रंगा ने निवेदन में वर्णित किया है कि गांव बोहली की जमीन हरियाणा सरकार तथा इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड ,पानीपत रिफाइनरी की स्थापना के लिए एक्वायर की गई। सन 1997 में गांव बोहली को दूसरी जगह विस्थापित किया गया।
ग्राम बोहली की जमीन का बहुत बड़ा हिस्सा रिफाइनरी परियोजना के लिए अधिग्रहित किया गया। जिसका विवरण मुख्य तौर पर इस प्रकार है। जिसमें सिंचित भूमि लगभग 4625 कैनाल , गैर संचित भुमि 1016 कैनाल , बारानी भूमि लगभग 10 कनाल , गैर कृषि भूमि लगभग 1002 कैनाल एक्वायर की गई।

रंगा ने कहा कि गांव बोहली में एक ऐसी बस्ती भी है ,जहां पानीपत रिफाइनरी के बीच में ही कुछ लोगों ने अपनी जमीन पर घर बना रखे हैं । आईओसीएल की जमीन बीच में होने के कारण लोगों को रास्ते में दिक्कत हो रही है। यहां रहने वाले लोगों को आने-जाने और सामान्य जीवन जीने में बहुत कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। रिफाइनरी का प्रदूषण सीधे जमीन और बस्ती पर आ रहा है। जिसके कारण वहां पर रहने वाले बच्चे महिलाएं, बुजुर्ग , लगातार बीमार पड़ रहे हैं । चारों तरफ से जमीन घिरी होने से जमीन में नमी की मात्रा कम हो गई है। और जमीन की उपजाऊ शक्ति भी कम हो गई है। पीने का पानी भी खराब हो चुका है । जमीन की मिट्टी और पानी को सरकारी प्रयोगशाला से जांच करवाई जाए तो सारी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी ।

रिफाइनरी में भूमि अधिग्रहण के समय ग्रामीणों के रोजगार , विकास तथा स्वास्थ्य देने के बड़े बड़े वादे किए गए। परंतु वास्तविकता सुविधाओं के विपरीत है ।
रिफाइनरी स्थापित होने के बाद बहुत कम युवाओं को रोजगार मिला । उनकी संख्या मात्र 15 से 20 ही हैं । हमारे गांव के युवाओं को भविष्य अंधकारमय हो चुका है।

गांव बोहली की आबादी लगभग 7000 के करीब है। गांव का छुटपुट ही युवा किसी सरकारी सेवा में है । गांव का स्कूल केवल कक्षा आठवीं कक्षा तक है। गांव की स्कूली छात्राओं को दूसरे गांव में पढ़ने जाना पड़ता है। जिससे स्कूली बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। युवा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कोई खेल का मैदान नहीं है।

रिफाइनरी ने दिखावे मात्र के लिए गांव को गोद लिया हुआ है । लोगों के स्वास्थ्य के प्रति रिफाइनरी संवेदन शून्य है।

गांव बोहली की अधिकांश आबादी अनुसूचित जाति समुदायों से संबंधित रखती हैं। ग्रामीण लोगों की अपेक्षाकृत शोषण का अनुभव हो रहा है ।

दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सामने मामले को उठाया गया है लेकिन यहां के विधायक और मंत्री बार-बार मिलने के बावजूद भी ग्रामीणों को पूरे कोरे आश्वासन दे रहे हैं ।
वास्तविकता में जनता के लिए कुछ नहीं किया।

उन्होंने सासंद से मांग की है कि गांव बोहली के बेरोजगार युवाओं को रिफाइनरी में नौकरी, मैडीकल, शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए युवाओं की ट्रेनिंग व्यवस्था , मकान , जलापूर्ति , सीवेरेज, पेड़ और अन्य संरचनाओं का समाधान किया जाए और लोगों को रिफाइनरी से उचित मुआवजा भी दिलवाया जाए।

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