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भारत के पहले मूर्तिकार जिन्होंने लगातार दो अंतरराष्ट्रीय वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए


मकराना की संगमरमर नगरी से उठी प्रतिभा: डॉ. श्री राम स्वामी ने विश्व मंच पर रचा इतिहास
Makrana | विशेष संवाददाता
राजस्थान की ऐतिहासिक संगमरमर नगरी Makrana से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है जिसने भारतीय मूर्तिकला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई है। मकराना मार्बल से जुड़ी पारंपरिक शिल्पकला को विश्व स्तर तक पहुँचाने वाले प्रसिद्ध मूर्तिकार डॉ. श्री राम स्वामी ने अपने अथक परिश्रम, समर्पण और अद्भुत प्रतिभा से नया इतिहास रच दिया है।
मकराना संगमरमर से जीवंत और अत्यंत उत्कृष्ट मूर्तियाँ बनाने की अपनी अनूठी क्षमता के कारण डॉ. श्री राम स्वामी को लगातार दो अंतरराष्ट्रीय वर्ल्ड रिकॉर्ड प्राप्त हुए हैं। इसके साथ ही अमेरिका की प्रतिष्ठित Cararbrook University ने उन्हें Honorary Doctorate (Hon. Dr.) की उपाधि से सम्मानित किया है।
यह उपलब्धि केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं बल्कि मकराना की सदियों पुरानी शिल्प परंपरा और मेहनतकश कारीगरों के सम्मान का प्रतीक बन गई है।
संगमरमर की ऐतिहासिक नगरी
राजस्थान का Makrana विश्वभर में अपने उत्कृष्ट संगमरमर के लिए प्रसिद्ध है। यह वही संगमरमर है जिससे विश्व के सात आश्चर्यों में शामिल प्रसिद्ध स्मारक Taj Mahal का निर्माण हुआ था।
सदियों से मकराना क्षेत्र में पत्थर को कला का रूप देने की परंपरा चली आ रही है। यहां के कारीगर संगमरमर को केवल निर्माण सामग्री नहीं बल्कि आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक अभिव्यक्ति का माध्यम मानते हैं।
इसी ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए डॉ. श्री राम स्वामी ने मकराना मार्बल मूर्तिकला को विश्व स्तर तक पहुंचाया है।
लगातार दो अंतरराष्ट्रीय वर्ल्ड रिकॉर्ड
डॉ. श्री राम स्वामी की अद्भुत प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता तब मिली जब प्रतिष्ठित संस्था London Book of World Records ने उन्हें
“World’s Fastest and Finest Makrana Marble Murti Artist”
के रूप में सम्मानित किया।
यह सम्मान उन्हें अत्यंत कम समय में अत्यंत जीवंत और उत्कृष्ट संगमरमर की मूर्तियाँ बनाने की अद्भुत क्षमता के लिए दिया गया।
लगातार दो अंतरराष्ट्रीय वर्ल्ड रिकॉर्ड प्राप्त कर उन्होंने मकराना मार्बल मूर्तिकला को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
अमेरिका से मिला मानद डॉक्टरेट
डॉ. श्री राम स्वामी की कला यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव तब आया जब अमेरिका की प्रतिष्ठित Cararbrook University ने उन्हें 22 फरवरी 2026 को Honorary Doctorate (Hon. Dr.) की उपाधि से सम्मानित किया।
यह सम्मान उन्हें मकराना मार्बल मूर्तिकला में उत्कृष्ट योगदान और भारतीय पारंपरिक कला को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने के लिए प्रदान किया गया।
इस सम्मान के बाद उनका नाम आधिकारिक रूप से डॉ. श्री राम स्वामी हो गया और वे मकराना मार्बल मूर्तिकला के लिए Hon. Dr. प्राप्त करने वाले विश्व के पहले कलाकारों में शामिल हो गए।
शिक्षा से समाज सेवा तक
डॉ. श्री राम स्वामी केवल एक कलाकार ही नहीं बल्कि शिक्षा और समाज सेवा से भी जुड़े रहे हैं।
उन्होंने
LSA (Veterinary)
B.Sc. (Agriculture)
M.Sc. (Agronomy)
जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त की।
लगभग 12 वर्षों तक उन्होंने कृषि शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करते हुए किसान परिवारों के बच्चों को पढ़ाया और उन्हें उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।
उनकी संस्था ATOM संस्थान के माध्यम से अनेक ग्रामीण छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान मिली।
400 वर्षों की कारीगरी की विरासत
डॉ. श्री राम स्वामी का परिवार पिछले लगभग 400 वर्षों से पत्थर की कारीगरी से जुड़ा हुआ है।
उनके पूर्वजों ने पीढ़ी दर पीढ़ी इस परंपरा को जीवित रखा।
परिवार की प्रमुख पीढ़ियाँ इस प्रकार हैं:
पिता – सोहन लाल स्वामी
दादा – भूर दास जी
परदादा – प्रेम दास जी
सड दादा – गुलाब दास जी
उससे पहले – मस्त दास जी
उससे पहले – सीता राम दास जी
आजादी से पहले उनके पूर्वज गांव की पहाड़ियों से पत्थर निकालकर हाथ से घटी (आटा पीसने की चक्की) और सिलबट्टे बनाया करते थे।
उनकी यह कारीगरी इतनी प्रसिद्ध हुई कि उनका गांव पूरे क्षेत्र में “चक्की वाला गांव” के नाम से जाना जाने लगा।
संकट का दौर
समय के साथ परिस्थितियाँ बदलीं और सरकार द्वारा स्थानीय पहाड़ियों से पत्थर निकालने पर रोक लगा दी गई।
इस निर्णय के कारण गांव की लगभग 15 खदानें बंद हो गईं और करीब 150 लोग बेरोजगार हो गए।
यह समय पूरे गांव के लिए अत्यंत कठिन था और कई वर्षों तक कारीगरों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा।
नई शुरुआत – मकराना की ओर
लगभग 5 वर्षों की कठिन बेरोजगारी के बाद गांव के कारीगरों ने नई शुरुआत की तलाश में मकराना की ओर रुख किया।
यहीं से मकराना मार्बल मूर्तिकला की नई यात्रा शुरू हुई।
पिछले 40 वर्षों से अधिक समय से यह परिवार मकराना संगमरमर की मूर्तियाँ बनाने के कार्य से जुड़ा हुआ है।
आज 30 कारखाने और 150 कारीगर
आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
डॉ. श्री राम स्वामी और उनके परिवार के प्रयासों से आज उनके गांव और आसपास के क्षेत्र में लगभग
30 से अधिक मार्बल कारखाने
150 से अधिक कारीगर
मूर्तिकला और संगमरमर के काम से जुड़े हुए हैं।
यह कारीगरी अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रही बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुकी है।
ATOM Marble Murti World & Handicrafts
डॉ. श्री राम स्वामी की संस्था ATOM Marble Murti World & Handicrafts आज मकराना मार्बल की उत्कृष्ट मूर्तियों के लिए देश और विदेश में जानी जाती है।
इस संस्था के माध्यम से बनी मूर्तियाँ भारत के कई मंदिरों और सांस्कृतिक स्थलों में स्थापित की जा चुकी हैं।
विदेशों में भी भारतीय संस्कृति के प्रतीक के रूप में इन मूर्तियों की मांग लगातार बढ़ रही है।
कई शहरों में संस्थान के केंद्र
ATOM संस्थान के कई स्थानों पर कार्यालय, दुकानें और कारखाने संचालित हो रहे हैं:
भूनी (नावां)
Kuchaman City
Makrana
Kishangarh
इन केंद्रों से संगमरमर की मूर्तियों और हस्तशिल्प का कार्य देश-विदेश में किया जा रहा है।
मुंबई में होगा अंतरराष्ट्रीय सम्मान समारोह
डॉ. श्री राम स्वामी की ऐतिहासिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में 18 अप्रैल 2026 को Radisson Blu Mumbai International Airport में एक भव्य अंतरराष्ट्रीय सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा।
इस समारोह में भारत और कई अन्य देशों के कलाकार, उद्योगपति और विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे।
युवाओं के लिए प्रेरणा
डॉ. श्री राम स्वामी का मानना है कि भारतीय मूर्तिकला केवल कला नहीं बल्कि संस्कृति, आस्था और परंपरा की पहचान है।
वे चाहते हैं कि नई पीढ़ी इस ऐतिहासिक कला से जुड़े और इसे आगे बढ़ाए।
उनका लक्ष्य है कि मकराना मार्बल की इस ऐतिहासिक कला को विश्व के अधिक से अधिक देशों तक पहुँचाया जाए और भारत की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत बनाया जाए।
✨ एक साधारण कारीगर परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचने की यह कहानी मकराना की मिट्टी, परंपरा और मेहनत की जीत है।
डॉ. श्री राम स्वामी ने यह साबित कर दिया है कि जब परंपरा और संकल्प साथ हों तो पत्थर भी इतिहास बन जाता है।

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