नूरानपुर में मंदिर की संपत्ति पर हनुमान नाथ का कब्जे का खेल, लाखों के पेड़ बेचकर कार खरीदने का मामला
पीलीभीत जनपद के बीसलपुर तहसील अंतर्गत कोतवाली दियोरिया कलां क्षेत्र के ग्राम नूरानपुर में स्थित श्री ठाकुर जी महाराज मंदिर एवं प्राचीन श्री शिव मंदिर की संपत्ति को लेकर बड़ा और गंभीर विवाद सामने आया है। इस पूरे प्रकरण में योगी हनुमान नाथ का नाम केंद्र में है, जिन पर मंदिर की संपत्ति पर कब्जा करने और उससे आर्थिक लाभ उठाने की बात सामने आई है।
मंदिर के पुजारी बाबा सर्वेश्वरदास के अनुसार, श्री ठाकुर जी महाराज मंदिर के नाम ग्राम नूरानपुर एवं जसाईनगर में कृषि भूमि दर्ज है, जिस पर पूर्व में विवाद होने पर न्यायालय में धारा 145 के तहत कार्यवाही हुई थी। दिनांक 4 नवंबर 2024 को उक्त भूमि पर पुजारी का कब्जा घोषित किया गया था। इसके बावजूद मंदिर की संपत्ति को लेकर लगातार हस्तक्षेप और दबाव की स्थिति बनी हुई है।
पुजारी के अनुसार, पिछले वर्ष मंदिर परिसर में खड़े लगभग 7 लाख रुपये मूल्य के पेड़ों को कटवाकर बेच दिया गया। इन पेड़ों में आम, गूलर, यूकेलिप्टिस, शीशम, नीम और अशोक जैसे कीमती पेड़ शामिल थे। बताया गया कि इन पेड़ों में दो पेड़ विशेष धार्मिक महत्व के थे, जिन पर पूर्व महंत शांति नाथ द्वारा ‘राम’ और ‘लक्ष्मण’ अंकित किया गया था, जिन्हें भी बिना किसी रोक-टोक के काटकर बेच दिया गया। इस घटना से स्थानीय श्रद्धालुओं और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
इतना ही नहीं, पेड़ों की बिक्री से प्राप्त धनराशि का उपयोग निजी लाभ के लिए किया गया और उसी राशि से एक कार खरीदे जाने की बात भी सामने आई है। इससे मंदिर की संपत्ति के दुरुपयोग का मामला और गंभीर हो गया है।
मामला यहीं तक सीमित नहीं है। पुजारी का कहना है कि मंदिर की भूमि और व्यवस्था पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत गांव के कुछ लोगों को साथ लेकर दबाव बनाने, पट्टेदारों को डराने-धमकाने और मंदिर की व्यवस्था में हस्तक्षेप करने की कोशिशें की जा रही हैं।
इसके साथ ही यह भी सामने आया है कि बाहरी व्यक्तियों को बुलाकर मंदिर की जमीन पर कब्जा करने की रणनीति बनाई जा रही है। 15 मार्च 2026 को मंदिर परिसर में हुई एक घटना में पुजारी के साथ अभद्रता और मारपीट का प्रयास भी किया गया, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई है।
वहीं, प्राचीन श्री शिव मंदिर को लेकर भी इसी तरह के आरोप सामने आए हैं। बताया गया कि इस मंदिर के नाम लगभग 20 एकड़ कृषि भूमि दर्ज है। पूर्व में इसकी देखभाल योगी शांति नाथ करते थे, जिनके निधन के बाद योगी हनुमान नाथ वहां रहने लगे। इसके बाद मंदिर परिसर में खड़े लगभग 5 लाख रुपये मूल्य के पेड़ों को भी कटवाकर बेच दिया गया, जिससे अब वहां एक भी पुराना पेड़ शेष नहीं बचा है।
इस पूरे घटनाक्रम से ग्राम नूरानपुर में तनाव और आक्रोश का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों और मंदिर से जुड़े लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच कराई जाए और मंदिर की संपत्ति को सुरक्षित रखते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।