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कटिहार के अमदाबाद प्रखंड के नीरपुर गांव में बेटियों ने रची इतिहास, गरीबी और दर्द को हराकर एक साथ 6 लड़कियां बनीं आलिमा


कटिहार जिले के अमदाबाद प्रखंड अंतर्गत नीरपुर गांव से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो आँखें नम कर देती है और दिल को हौसले से भर देती है। इस छोटे-से गांव की छह बेटियों ने तमाम आर्थिक तंगी, सामाजिक रुकावटों और जीवन की कठोर सच्चाइयों के बावजूद इस्लामी तालीम पूरी कर आलिमा की डिग्री हासिल की है। यह सिर्फ सफलता नहीं, बल्कि संघर्ष, सब्र और दुआओं की जीत है।
इन छह आलिमाओं में सबसे भावुक कहानी सोनी खातून की है। सोनी खातून की माँ एक तलाकशुदा महिला हैं, जो बेहद गरीब हालात में एक छोटी-सी किराना दुकान चलाकर अपनी बेटी की परवरिश और पढ़ाई का खर्च उठाती रहीं। कई बार घर में चूल्हा जलाना भी मुश्किल हो जाता था, लेकिन उस माँ ने अपनी बेटी के सपनों की लौ कभी बुझने नहीं दी। समाज की बातों, तानों और परेशानियों के बीच भी उन्होंने अपनी बेटी की किताबें बंद नहीं होने दीं।
आज उसी माँ की आँखों में खुशी के आँसू हैं, क्योंकि उसकी बेटी आलिमा बन चुकी है। यह कामयाबी सिर्फ सोनी खातून की नहीं, बल्कि हर उस माँ की जीत है, जो सीमित साधनों में भी अपनी बेटियों को आगे बढ़ते देखना चाहती है।
नीरपुर गांव की बाकी पाँच बेटियों ने भी यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो बेटियाँ किसी से कम नहीं। इनकी मेहनत और लगन ने पूरे गांव को गर्व से भर दिया है और समाज को यह संदेश दिया है कि शिक्षा बेटियों की सबसे बड़ी ताकत है।
गांव वालों का कहना है कि यह कामयाबी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल है। नीरपुर गांव की बेटियों ने यह दिखा दिया कि गरीबी, मजबूरी और मुश्किल हालात भी बेटियों के हौसलों को तोड़ नहीं सकते।
आज नीरपुर गांव सिर्फ जश्न नहीं मना रहा, बल्कि अपनी बेटियों पर फख्र कर रहा है। यह कहानी हर उस घर तक पहुँचना चाहिए, जहाँ बेटियों के सपनों को हालातों के कारण दबा दिया जाता है।

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