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गुरु घासीदास संस्कृतिक सतनाम भवन में भूदान स्मृति विचार एवं सद्भावना यात्रा का हुआ स्वागत


राजनांदगांव / अध्यात्मिक उत्तराधिकारी आचार्य विनोबा भावे के आश्रम पवनार (वर्धा) से भूदान उद्गम स्थल पोचमपल्ली (तेलंगाना) के लिए यात्रा दिनांक 25 मार्च को प्रारंभ हुई। यात्रा नागपुर, भंडारा, मोहाडी अंधरगांव, गोंदिया, आमगांव होकर आज पांचवें दिन छत्तीसगढ़ के राजनंद गांव पहुंची।यह यात्रा टोली 18 अप्रैल 2026 को पोचमपल्ली विराम होगी। भूदान यज्ञ का यह हीरक जयंती वर्ष होने के क्रम में भूदान स्मृति विचार एवं सद्भावना यात्रा पवनार आश्रम वर्धा महाराष्ट्र से पोचमपल्ली भूदान गंगोत्री तक विनोबा विचार प्रवाह द्वारा आयोजित की जा रही है। जिसका शुभारंभ ब्रह्मविद्या मंदिर पवनार के स्थापना दिवस 25 मार्च 2026 के अवसर पर ऋषि तुल्य साधिका बहनों का आशीर्वाद प्राप्त कर किया गया है। राजनांदगांव से यात्रा दुर्ग, , रायपुर, श्रीपूर्णा, गिरौतपुरी आश्रम,अभनपुर चारामा, केशकाल, कोंडागांव जगदलपुर दंतेवाड़ा से उड़ीसा राज्य के मलकानगिरी कोरापुट, रायगढ़ा गुनपुर के सेवा समाज होती हुई आंध्रप्रदेश राज्य में यात्रा का प्रवेश पार्वतीपुरम में 11 अप्रैल को होगा वहां से विजय नगरम, एलमांचिली, मल्लवरम, राजमुंदरी विजयवाडा होती हुई तेलंगाना के कोडाड, नलगोंडा से पोचमपल्ली में आयोजित भूदान हीरक जयंती समारोह में शामिल होकर विराम लेगी। पूज्य विनोबा जी ने भूदान की गंगा सम्पूर्ण देश में पैदल चलकर 13 वर्ष के आसपास प्रवाहित की। भूदान यज्ञ से कोई राज्य अछूता नहीं रहा। सर्वाधिक समय यात्रा का बिहार में बीता। भूदान आंदोलन में लोगों द्वारा लगभग 45 लाख एकड़ भूमि का दान बाबा विनोबा को प्राप्त हुआ जिसका वितरण भी भूमिहीनों में किया गया।यह एक ऐसी घटना मानी गई जिसने पूरे विश्व को आश्चर्यचकित किया। उस जमाने में भी दुनिया भर के लोग भूदान यात्रा में शामिल होने आने लगे। जिन्होंने अपनी आंखों से इस अकल्पनीय परमेश्वरीय कृत्य को देखा। पदयात्रा के सूत्रधार रमेश भइया ने हरिजन सेवक संघ संस्था का विशद परिचय देते हुए बताया कि 1932 में संघ की स्थापना हुई। जिसका मुख्यालय दिल्ली में हैं।इस संस्था ने देश में अस्पृश्यता निवारण का बड़ा पुण्य कार्य किया । विनोबा जी ने देश के अनेक बड़े मंदिरों में हरिजनों के प्रवेश के लिए खुलबाए। स्वयं तीन वर्ष तक सुरगांव तक रोज सफाई के लिए जाते थे। उन्होंने श्रम प्रतिष्ठा पर बहुत जोर दिया। यात्री श्री राजेंद्र यादव ने राजस्थान में आदिवासी बच्चों की शिक्षा का जो प्रयोग चल रहा है। उसकी कहानी सुनाई। श्री राकेश जी ने बताया कि महाराष्ट्र छत्तीसगढ़ उड़ीसा आंध्रप्रदेश और तेलंगाना की भूदान स्मृति यात्रा के माध्यम से नई पीढ़ी को भूदान के बारे में जानकारी देना है। हमें विनोबा जी के विचारों को आत्मसात करना है। जिससे उत्तम समाज का निर्माण हो सके। कई देशों की पदयात्रा कर चुके श्री जालंधर नाथ भाई ने हर देश में तू हर वेश में तू तेरे नाम अनेक तू एक ही है गीत सुनाया। इस अवसर पर सतनामी समाज के जिला अध्यक्ष युवराज दास ढिरहेर जी पूर्व अध्यक्ष श्री पंकज बांधव , उपाध्यक्ष श्रीमती प्रतिमा बंजारे, सुलोचना मार्कण्डेय, जिला अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ हरीश सोनवानी जी,नाम दास मार्कण्डेय,प्रेम कुमार बंजारे, नरेश टंडन, दुर्गेश द्विवेदी तथा रायपुर से पधारे श्री अश्विनी बबलू त्रिवेंद्र, अजीत महिपाल जी , हिमेश जांगड़े,ने प्रार्थना में भाग लिया। तथा समाज की ओर से सभी यात्रियों का स्वागत अंगवस्त्र से किया। यात्रा टोली आज रात्रि विश्राम के बाद कल सुबह नौ बजे दुर्ग के लिए प्रस्थान करेगी। यात्रा के लिए शुभेक्षा श्री हरीश सोनवानी ने दी। टोली की ओर से सभी का आभार कमलेश प्रेमी ने व्यक्त किया।

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