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यह सिर्फ खाना न बन पाने की बात नहीं है, बल्कि उस बेबसी, लाचारी और घुटन की तस्वीर है जो एक आम इंसान झेलता है।

भावार्थ: यह पंक्ति गरीबी, मजबूरी और व्यवस्था की विफलता को दिखाती है। गैस सिलेंडर जैसी बुनियादी चीज़ न मिलने से घर की रसोई ठप है, और उस चुप्पी में इंसान खुद को कैद जैसा महसूस कर रहा है।
यह सिर्फ खाना न बन पाने की बात नहीं है, बल्कि उस बेबसी, लाचारी और घुटन की तस्वीर है जो एक आम इंसान झेलता है।

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