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बैंक घोटाले में कड़ी सजा, 33 करोड़ मामले में तीन दोषी करार #सरायकेला: सरायकेला कॉपरेटिव बैंक से जुड़े 33 करोड़ रुपये के चर्चित घोटाला मामले में अदालत

बैंक घोटाले में कड़ी सजा, 33 करोड़ मामले में तीन दोषी करार

#सरायकेला: सरायकेला कॉपरेटिव बैंक से जुड़े 33 करोड़ रुपये के चर्चित घोटाला मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। एंटी करप्शन ब्यूरो के विशेष न्यायाधीश पीयूष श्रीवास्तव की अदालत ने शाखा प्रबंधक सुनील कुमार सत्पति और व्यवसायी संजय डालमिया को 10-10 वर्ष की सजा सुनाई है, जबकि सहायक कर्मचारी मनीष देवगम को 5 साल की कैद दी गई है।

वर्ष 2019 में उजागर हुए इस घोटाले की जांच सीआईडी द्वारा की गई थी। जांच में करोड़ों रुपये के गबन और धोखाधड़ी की पुष्टि होने के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया।

न्यायालय ने गबन के आरोप में दोनों मुख्य दोषियों को 10-10 साल की सजा दी है। साथ ही धोखाधड़ी के मामले में 7-7 साल की अतिरिक्त सजा और 1.20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं मनीष देवगम को प्रथम अपराध मानते हुए 5 साल की सजा के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 4 साल की सजा और 15 हजार रुपये का जुर्माना भी दिया गया है।

इस फैसले को बड़े आर्थिक अपराधों के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इससे बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर उम्मीदें और मजबूत हुई हैं।

📢 #JharkhandNews #Saraikela #ScamCase #CourtDecision #BreakingNews

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#सरायकेला: सरायकेला कॉपरेटिव बैंक से जुड़े 33 करोड़ रुपये के चर्चित घोटाला मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। एंटी करप्शन ब्यूरो के विशेष न्यायाधीश पीयूष श्रीवास्तव की अदालत ने शाखा प्रबंधक सुनील कुमार सत्पति और व्यवसायी संजय डालमिया को 10-10 वर्ष की सजा सुनाई है, जबकि सहायक कर्मचारी मनीष देवगम को 5 साल की कैद दी गई है।

वर्ष 2019 में उजागर हुए इस घोटाले की जांच सीआईडी द्वारा की गई थी। जांच में करोड़ों रुपये के गबन और धोखाधड़ी की पुष्टि होने के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया।

न्यायालय ने गबन के आरोप में दोनों मुख्य दोषियों को 10-10 साल की सजा दी है। साथ ही धोखाधड़ी के मामले में 7-7 साल की अतिरिक्त सजा और 1.20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं मनीष देवगम को प्रथम अपराध मानते हुए 5 साल की सजा के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 4 साल की सजा और 15 हजार रुपये का जुर्माना भी दिया गया है।

इस फैसले को बड़े आर्थिक अपराधों के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इससे बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर उम्मीदें और मजबूत हुई हैं।

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