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स्वतंत्रता के बाद हमारी जनसंख्या लगभग तीन गुना बढ़ चुकी है। कितनी ही ट्रेनें चलें,कितने ही मार्ग बनाए जाएं। कहीं भी भीड़ कम होती नहीं दिखाई दे रही है।

हमारी जनसंख्या उपलब्ध संसाधनों के अनुपात में तीन गुना बढ़ गई है। महानगरों या गांवों में रहने वाला कोई भी व्यक्ति इस स्थिति से शायद ही अपरिचित होगा। वर्ष 2011की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश की जनसंख्या 18 करोड़ से अधिक थी जो कि पूरे देश की जनसंख्या का 16.5 प्रतिशत है। जनसंख्या का सबसे अधिक दबाव भूमि पर पड़ रहा है। लगातार बढ़ती जनसंख्या के कारण खेती योग्य भूमि एवं आवास की कमी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। उर्जा हमें अलग-अलग रूपों में उपलब्ध होती है।यह सूर्य के प्रकाश बहते जल वायु तथा भोज्यपदार्थ में प्राकृतिक रूप से संचित होती है। ऊर्जा ही हमें अपने दैनिक कार्य करने तथा हमारी सुख सुविधाओं का उपयोग करने में सहायता करती है ‌। ईंधन हमें भोजन पकाने वाहनों को चलाने तथा विद्युत उत्पादन करने में तथा कारखानों में मशीनें चलाने के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं। गोबर के कंडे लकड़ी कोयला डीजल पेट्रोल व मिट्टी के तेल एलपीजी हमारे द्वारा हमारे द्वारा उपयोग किए जाने वाले कुछ मुख्य साधन हैं। ईंधन से ऊर्जा प्राप्त करने के लिए पहले उसे जलाया जाता है।जलने की क्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड जलवाष्प कुछ अन्य गैसें तथा कुछ ठोस कण मुक्त करते हैं, वो हमें धुएं के रूप में दिखाई देते हैं। क्रमशः

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