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7 बच्चों का पिता ढलाराम जिंदगी-मौत से जूझ रहा, इलाज के लिए चाहिए रुपए

बालोतरा जिले के मूंगड़ा गांव की कच्ची गलियों में एक ऐसा घर भी है, जहां हर सुबह उम्मीद के साथ शुरू होती है, लेकिन हर रात बेबसी के आंसुओं में खत्म हो जाती है। इस घर में खाट पर लेटे ढलाराम भील की सांसें ही अब पूरे परिवार की सबसे बड़ी चिंता बन गई हैं।

बीमारी से बड़ी मजबूरी, रोजी-रोटी का संकट

दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाले ढलाराम आज जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। पेट में आंत की गंभीर बीमारी ने उन्हें इस कदर कमजोर कर दिया है कि अब वह उठने तक की स्थिति में नहीं हैं।

बेबसी में परिवार की आंखें मदद को तरसतीं

ढलाराम के परिवार में पांच बेटियां और दो बेटे हैं। सातों मासूम बच्चों की आंखों में एक ही सवाल तैरता है कि पापा ठीक कब होंगे? पत्नी की सूनी आंखें और कांपते हाथ हर आने-जाने वाले से एक ही गुहार करते हैं कि किसी तरह उनके घर के सहारे को बचा लिया जाए।

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