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मेडिकल कॉलेज में पत्रकार से मारपीट से मचा बवाल, डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग तेज; स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल


एटा। जनपद के मेडिकल कॉलेज में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष पंकज गुप्ता के साथ हुई कथित मारपीट की घटना ने तूल पकड़ लिया है। इस घटना के बाद पत्रकारों में भारी आक्रोश व्याप्त है और पूरे प्रकरण को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था व मेडिकल कॉलेज प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि पंकज गुप्ता एक जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। इसी दौरान जब वह मेडिकल संबंधी समस्या को लेकर डॉक्टर से बातचीत कर रहे थे, तभी विवाद उत्पन्न हो गया। आरोप है कि डॉ. मुकेश परमार ने न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया बल्कि गुस्से में आकर पत्रकार के साथ मारपीट भी कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डॉक्टर ने पत्रकार को धमकाते हुए थप्पड़ जड़ दिए, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
घटना की जानकारी मिलते ही जिले भर के पत्रकार बड़ी संख्या में मेडिकल कॉलेज पहुंच गए और दोषी डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। पत्रकारों ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह इस मामले को दबाने का प्रयास कर रहा है।
स्थिति बिगड़ती देख स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि सूत्रों का कहना है कि पुलिस व मेडिकल प्रशासन के बीच इस मामले को समझौते के जरिए शांत कराने की कोशिश की गई, लेकिन पत्रकार इस पर सहमत नहीं हैं और न्याय की मांग पर अडिग हैं।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर मेडिकल कॉलेज की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। पत्रकारों का आरोप है कि यहां डॉक्टरों की मनमानी चरम पर है। न तो समय पर डॉक्टर उपलब्ध रहते हैं और न ही मरीजों के साथ उचित व्यवहार किया जाता है। कई बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, जिससे डॉक्टरों के हौसले बुलंद हैं।
गंभीर आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि मेडिकल कॉलेज में जांचों को बाहर से कराने का दबाव बनाया जाता है और इस पूरे खेल में कमीशनखोरी का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। मरीजों को अनावश्यक रूप से बाहर भेजा जाता है, जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। इस संबंध में पूर्व में भी कई शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई के अभाव में स्थिति जस की तस बनी हुई है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य बलबीर सिंह की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि उनके कार्यकाल में अव्यवस्थाएं बढ़ी हैं और शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता। कुछ डॉक्टरों को संरक्षण दिए जाने की बात भी सामने आ रही है, जिससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पत्रकार संगठनों का कहना है कि जब एक जिम्मेदार पत्रकार, जो कि जिला स्वास्थ्य समिति का सदस्य भी है, उसके साथ इस तरह की घटना हो सकती है, तो आम जनता के साथ कैसा व्यवहार होता होगा, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता और समाज के चौथे स्तंभ पर सीधा प्रहार है।
ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन ने इस मामले को उच्च अधिकारियों तक ले जाने का निर्णय लिया है और दोषी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
वहीं, प्रोग्रेसिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष पवन चतुर्वेदी ने भी इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि पूरी पत्रकार बिरादरी एकजुट है और जब तक पंकज गुप्ता को न्याय नहीं मिलता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
फिलहाल इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर प्रश्नचिह्न लगाया है, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही पर भी बहस छेड़ दी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।

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